मोदी की सुनामी में उड़ गई वंशवाद की राजनीति, मुख्यमंत्रियों के बेटे-बेटी से लेकर ‘महाराज’ तक हारे

Published : May 25, 2019 06:18 pm | By: National Mindset News

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इस लोकसभा चुनाव में वंशवाद की राजनीति को करारा झटका लगा है। इस बार न केवल जातीय गणित फेल हुआ है, बल्कि वंशवादी राजनीति को भी जड़ें हिल गयी हैं। राजनीतिक परिवार से आने वाले ज्यादातर उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा है। उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह का परिवार हो, या बिहार में लालू प्रसाद का परिवार हो, या फिर हरियाणा में हुड्डा परिवार और महाराष्ट्र का पवार परिवार. सभी परिवारों के उम्मीदवारों को मतदाताओं ने नकार दिया है।


उत्तर प्रदेश से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव को छोड़कर परिवार के सारे नेता हार गए। मुलायम सिंह यादव की बहू और अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव कन्नौज से, मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव बदायूं से और फिरोजाबाद सीट से मुलायम सिंह के भाई शिवपाल और भतीजे अक्षय यादव की हार हुई है। वहीं राष्ट्रीय लोकदल के नेता अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी भी चुनाव हार गए। कांग्रेस के दिवंगत नेता जितेंद्र प्रसाद के पुत्र जितिन प्रसाद उत्तर प्रदेश की धौरहरा सीट से चुनाव हारे हैं। मध्य प्रदेश के गुना से कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को हार का मुंह देखना पड़ा। अबतक गुना सीट सिंधिया परिवार का अभेद्य किला माना जाता था। 1971 से लगातार ग्वालियर राजपरिवार गुना से जीतता आ रहा था। पिछले चार बार से ज्योतिरादित्य गुना से सांसद थे। हालांकि प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ अपने बेटे नकुलनाथ को किसी तरह जीत दिलवाने में कामयाब रहे। राजस्थान में भी वंशवाद की विरासत के सहारे संसद पहुंचने की उम्मीद लगाए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बेटे वैभव गहलोत को जोधपुर सीट से हार का मुंह देखना पड़ा। राजस्थान में ही बीजेपी के संस्थापक सदस्यों में से एक जसवंत सिंह के बेटे मानवेंद्र सिंह बाड़मेर लोकसभा सीट से चुनाव हार गए। मानवेंद्र सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपिंदर सिह हुड्डा और उनके बेटे दीपेंद्र सिंह हुड्डा भी चुनाव हार गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला और पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के परिवार की तीसरी पीढ़ी के भव्य बिश्ननोई को भी इस मोदी लहर में जनता ने नकार दिया है। बिहार से भी लालू परिवार का सफाया हो गया है। लालू यादव की बेटी मीसा भारती को पाटलिपुत्र सीट पर और समधी चंद्रिका राय को सारण सीट पर हार का सामना करना पड़ा है। महाराष्ट्र में एनसीपी के प्रमुख शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले तो बारामती से जीत गईं, लेकिन उनके भतीजे और पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के पुत्र पार्थ, मावल से चुनाव हार गए। इसके अलावा कांग्रेस के दिवंगत नेता मुरली देवड़ा के बेटे मिलिंद देवड़ा मुंबई दक्षिण सीट हार गए। तेलंगाना में मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की बेटी कविता कलवाकुंतला निजामाबाद से चुनाव हार गईं। कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा के पोते और मुख्यमंत्री एच.डी. कुमारस्वामी के बेटे निखिल कुमारस्वामी मांड्या से चुनाव हार गए। एच.डी. देवेगौड़ा खुद तुमकुर सीट से चुनाव हार गए। इसबार की मोदी लहर ने भारतीय राजनीति को कई बड़े झटके दिए है, जिसमें प्रमुख है वंशवाद का सफाया।


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