पीएम मोदी ने दिखायी नेताओं के बीच राजनीतिक कटुता के पीछे छुपी आत्मीय संबंधों की तस्वीर।

Published : Apr 24, 2019 08:02 pm | By: National Mindset News

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लोकसभा चुनाव की गहमागहमी, उठापटक और आरोप प्रत्यारोप के बीच बुधवार को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक गैरराजनीतिक इंटरव्यू, हवा के ठंडे झोंके की तरह लोगों के सामने आया। फिल्म अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बिल्कुल अनौपचारिक माहौल में हुई इस बातचीत में प्रधानमंत्री ने अपने जीवन से जुड़े कुछ अनछुए पहलुओं के बारे में काफी बेबाकी से बताया।


इसमें न कहीं राजनीति की तपिश थी और न चुनावी पैंतरेबाजी। इंटरव्यू तो आपने देख ही लिया होगा। अक्षय कुमार ने क्या सवाल किए और पीएम का क्या जवाब था, यह भी आपने सुन लिया। लेकिन प्रधानमंत्री बताना क्या चाहते थे, ये शायद आप पूरी तरह समझ न पाए हों। कुछ लोग इस इंटरव्यू का पोस्टमार्टम भी करेंगे, पीएम की बातों को राजनीति से जोड़कर भी मतलब निकालेंगे। लेकिन यकीन मानिए, किसी भी राजनीति से इतर, ये सही मायने में प्रधानमंत्री के मन की बात थी। इस पूरी बातचीत में प्रधानमंत्री यही बताना चाह रहे थे कि राजनेताओं का राजनीति और विचारधारा से अलग भी एक चेहरा होता है, व्यक्तिगत संबंध होते हैं, आपसी भाईचारा होता है। आज की सियासत में भाषाई मर्यादा की जो गिरावट दिख रही है, वही पूरा सच नहीं है। विचारधारा के स्तर पर एक दूसरे के धुर विरोधी भी व्यक्तिगत स्तर पर अच्छे दोस्त हैं, शुभचिंतक हैं। मोदी जी का यह कहना ही अपने आप में काफी है कि ममता दीदी आज भी मुझे खुद से पसंद किए हुए दो तीन कुर्ते और बंगाली मिठाईयां हर साल भेजती हैं। कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद और अहमद पटेल से वर्षों पुरानी दोस्ती है। बराक ओबामा से उनके राष्ट्रपति रहते और उसके बाद भी कूटनीति के अलावा व्यक्तिगत दोस्ताना है। कहने का मतलब ये कि लोग अपने दिल से निकाल दें कि नेताओं की आग उगलती जुबान ही उनकी हकीकत है। इसके अलावा भी उनके सामाजिक सरोकार हैं, व्यक्तिगत संबंध हैं, आपसी प्यार है दोस्ती है जो सार्वजनिक जीवन में हमेशा सामने नहीं दिखता। इसके अलावा भी प्रधानमंत्री ने अपने जीवन से जुड़ी कई बातें साझा की। उन्होंने बताया कि गुस्सा और नकारात्मक सोच आपके व्यक्तित्व के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इस चुनावी झंझावात के बीच ऐसा बेबाक और बिना लाग लपेट का इंटरव्यू देने के लिए भी बड़ी हिम्मत चाहिए, जिसकी नरेन्द्र मोदी में कोई कमी नहीं है। राजनीति के खेल निराले होते हैं। इसे समझना हर किसी के बूते की बात नहीं है, लेकिन अपने नेताओं के भीतर भी हम थोड़ा झांक पाएं तो शायद राजनीति उतनी भी बुरी नहीं दिखेगी।     


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