प्रशांत किशोर की रणनीति - आंध्रप्रदेश में जगनमोहन रेड्डी को दिलायी ऐतिहासिक जीत

Published : Jun 05, 2019 08:16 pm | By: National Mindset News

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पिछले कुछ वर्षों में हुए हर चुनाव के दौरान दिग्गज चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर का नाम सुर्खियों में रहा है। लेकिन इस लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर कहीं नजर नहीं आए। जेडीयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और नीतीश कुमार के करीबी होते हुए भी पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान प्रशांत किशोर सीन से पूरी तरह गायब रहे। लेकिन ऐसा था नहीं। इस चुनाव में पीके और उऩकी टीम चुपचाप आंध्रप्रदेश में वाईएसआर कांग्रेस के लिए काम कर रही थी और नतीजे आने के बाद उन्होंने एकबार फिर ये साबित कर दिया कि आज के दौर में चुनावी रणनीति तैयार करने के मामले में उऩका कोई मुकाबला नहीं कर सकता।


2014 के आम चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्य चुनावी रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर ने इस साल के चुनाव में एक बार फिर से अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। उन्होंने आंध्र प्रदेश में जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआर कांग्रेस की 'सुनामी जीत' में बहुत ही अहम भूमिका निभाते हुए फिर से 'अपने बिजनेस' में जोरदार वापसी की है। प्रशांत किशोर की रणनीति ने उस चंद्रबाबू नायडू को सत्ता से बाहर कर दिया जो आम चुनाव के परिणाम आने से कुछ दिन पहले तक तीसरा मोर्चा बनाने की अगुवाई कर रहे थे। प्रशांत किशोर ने साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए रणनीति तैयार की थी, लेकिन तब कांग्रेस को बुरी तरह मुंह की खानी पड़ी थी। 23 मई को परिणाम आने के बाद प्रशांत किशोर ने अपने संगठन आई-पीएसी (इंडियन पॉलिटिकल एक्शन) का हवाला देते हुए ट्वीट किया, 'आंध्र प्रदेश और सभी  सहयोगियों को इस एकतरफा जीत के लिए धन्यवाद। नए मुख्यमंत्री को बधाई और बहुत शुभकामनाएं'। बिहार की सत्ताधारी पार्टी जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को नीतीश कुमार ने इस चुनाव में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं सौंपी थी। बताया गया कि बीजेपी का शीर्ष नेतृत्व पीके को पसंद नहीं करता और बीजेपी के दबाव में ही नीतीश कुमार ने पीके को चुनाव से दूर रखा। कहीं न कहीं बीजेपी, युवाओं के बीच जदयू के विस्तार की प्रशांत किशोर की योजना को पसंद नहीं कर रही थी। नीतीश कुमार ने बीजेपी की असहजता को तेजी से समझते हुए अपने उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर को किनारे करने का फैसला लिया। नीतीश कुमार के दोबारा बीजेपी के साथ जाने के फैसले पर भी प्रशांत किशोर ने सवाल उठाये थे, जिसके कारण भी नीतीश कुमार उनसे नाराज बताये जा रहे थे। जेडीयू में अपनी अनदेखी होती देख पीके ने चुपचाप उत्तर भारत से अपना तम्बू समेटा और सीधे दक्षिण में जगन रेड्डी का रूख किया। अब आंध्र प्रदेश में जगन रेड्डी की पार्टी को मिली शानदार कामयाबी के बाद प्रशांत किशोर के लिए कोई सीमा नहीं रह गयी है। इससे पहले प्रशांत किशोर ने साल 2014 आम चुनावों में नरेंद्र मोदी और 2015 में नीतीश कुमार के मुख्य चुनावी रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी, लेकिन साल 2017 में उन्होंने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए काम किया, लेकिन वहां कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद प्रशांत किशोर ने खुद को बहुत हद तक सीमित कर लिया था। लेकिन जिन लोगों को ये लग रहा था कि प्रशांत किशोर का करिश्मा खत्म हो चुका है, वे सब एक बार फिर गलत साबित हुए हैं।


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