महिलाओं को मुफ्त यात्रा का झांसा, अरविंद केजरीवाल को कितना मिलेगा फायदा

Published : Jun 06, 2019 07:50 pm | By: National Mindset News

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शहर के एक रेस्टोरेंट ने घोषणा की कि उसके यहां महिलाओं को खाना मुफ्त मिलेगा। पूरे शहर में हंगामा मच गया। अगले दिन रेस्टोरेंट के बाहर महिलाओं की लंबी कतारें लग गयीं। तब रेस्टोरेंट का मालिक हाथ जोड़कर बाहर निकला और कहने लगा, मैं तो मुफ्त खाना खिलाना चाहता हूं जी, पर क्या करें...पकाने के लिए हमारे पास न चावल है, न आटा है, न सब्जी है न तेल मसाले हैं....कैसे खिलाऊं। वही हाल है दिल्ली का....मामला तो आप समझ ही गये होंगे....जी वही....महिलाओं को डीटीसी और मेट्रो में मुफ्त यात्रा की घोषणा


....लोकसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी की दुर्गत हो चुकी है, और अब दिल्ली में 2020 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। मुख्यमंत्री केजरीवाल ने महिला मतदाताओं को लुभाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट सेवा को मुफ्त किए जाने की बात कही है। सीएम ने इस घोषणा को महिला सुरक्षा से जोड़ा है। अब ये तो केजरीवाल जी ही बता सकते हैं कि मुफ्त यात्रा से महिलाएं सुरक्षित कैसे हो जाएंगी। अब थोड़ा दिल्ली में डीटीसी की हालत पर बात कर ली जाए जिससे समझ में आएगा कि मुफ्त यात्रा की घोषणा कितना बड़ा फ्रॉड है। दिल्ली में पिछले 9 सालों में एक भी नयी बस नहीं खरीदी गयी है। 2011-12 में डीटीसी के पास 6 हजार से ज्यादा बसें थीं जो अब घटकर लगभग 3700 रह गयी हैं। इसमें भी 700 से 800 बसें रोज खराब रहती हैं। इसके अलावा लगभग 1500 क्लस्टर बसें हैं। 2012 में सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गयी एक रिपोर्ट में दिल्ली को आबादी के हिसाब से 11 हजार बसों की जरूरत बतायी गयी थी। तब दिल्ली की आबाजी 1 करोड़ 60 लाख के करीब थी। आज 2 करोड़ 25 लाख है। 2012-13 में रोजाना लगभग 40 लाख लोग बसों में सफऱ करते थे। आज 24 लाख कर रहे हैं। सड़कों पर ज़्यादातर वही बसें हैं जो कॉमनवेल्थ गेम्स के समय आई थीं। ये बसें 2008-09 के दौरान आनी शुरू हो गई थीं। यानी 2019 तक इन बसों की उम्र लगभग 10 साल के करीब हो गई है और जल्द ही इनमें से ज्यादातर बसें चलने लायक नहीं रहेंगी। नई बसों की ख़रीद नहीं होने की वजह से संख्या तो बढ़ी नहीं, उल्टे जिस रफ्तार में बसें ख़राब हो रही हैं उससे अगले साल तक इनकी संख्या भी आधी रह जाएगी। केजरीवाल साहब की सरकार के साढ़े चार साल हो चुके हैं। पहले दिन से कह रहे हैं 3500 बसें खरीदी जाएंगी। आजतक नहीं खऱीदी गयी। जरूरत 15 हजार बसों की है और चल रही हैं चार हजार। दिल्ली की महिलाओं को मुफ्त में बिठाया कहां जाएगा, पहले ये तो बता दें आप। यदि हो भी जाती है तो सरकार की जेब पर सालाना 1000 करोड़ का बोझ बढ़ेगा। पिछले वित्त वर्ष में डीटीसी को 1000 करोड़ का नुकसान भी हुआ था। नयी बसों के लिए पैसे नहीं जुट पा रहे, हर साल स्थायी कर्मचारी कम होते जा रहे हैं, एक भी नयी बहाली नहीं हुई, कांट्रैक्ट कर्मचारियों को स्थायी करने का वादा आज तक पूरा नहीं हुआ....कहां से भरोगे 1000 करोड़। और क्यों दोगे मुफ्त सेवा। मांगा किसने है आपसे। दिल्ली की पर केपिटा इंकम 3 लाख 60 हजार से ज्यादा है। उन्हें नहीं चाहिए आपकी मुफ्त की रेवड़ियां। उन्हें चाहिए बेहतर सुविधाएं। ये जो हजार करोड़ आप मुफ्त में बांटोगे उससे हर साल एक हजार नयीं बसें खऱीदी जा सकती हैं, जो आपसे आजतक हो नहीं पाया। दिल्ली सरकार ने सितंबर 2018 तक ग्रीन टैक्स के तहत 1800 करोड़ रुपए वसूले हैं। इन पैसों से सरकार को पब्लिक ट्रांसपोर्ट में सुधार करना था, लेकिन अभी तक दिल्ली में इस फंड का कोई प्रभावी इस्तेमाल नज़र नहीं आया है। जिस साल सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा करने को कहा था, दिल्ली में उसी साल भारी बहुमत वाली अरविंद केजरीवाल सरकार बनी थी। लेकिन ग्रीन टैक्स के तहत इक्ट्ठा किए गए पैसे का इस्तेमाल बसों की ख़रीददारी में भी नहीं किया गया। खैर, ये तो तब की बात है जब योजना लागू होगी। लेकिन पहले तो सवाल यही है कि लागू कब होगी। यदि घोषणा कर दी तो कल से लागू कीजिए। दिक्कत कहां है। जो महिलाएं टिकट लेकर चल रही हैं, वो टिकट लेना बंद कर देंगी, बस। लेकिन नहीं....लागू होने में 3 से 4 महीने लगेंगे जो होते होते 6 महीने हो जाएगा। तबतक चुनाव की घोषणा हो जाएगी और केजरीवाल साहब कहेंगे कि मैंने तो दे दिया है जी....बस अगली सरकार बनते ही लागू भी हो जाएगा। तो लोग अब इन जुमलेबाजियों में फंसने वाले नहीं हैं....आपकी 3500 बसें आयी नहीं, 2 लाख सीसीटीवी कैमरे लगे नहीं, पूरी दिल्ली में मुफ्त वाईफआई लगा नहीं, एक भी नया कॉलेज बना नहीं, मुफ्त मुहल्ला क्लिनिकों में न डॉक्टर हैं न सुविधाएं, ज्यादातर बंद पड़ी हैं, मुफ्त पानी दे रहे हो तो पानी ही नहीं है, बिजली सस्ती की तो बिजली का बुरा हाल है....आखिर आपके किन किन जुमलों पर लोग भरोसा करें। इन सबके बीच केजरीवाल साहब की ये फ्री बस सवारी ठीक वैसी ही होगी जैसे होटल में मुफ्त खाने का न्यौता तो दे दिया, लेकिन खाना है ही नहीं।

 

 

 


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