स्वतंत्रता के अधिकार का उलझता जाल

Published : Jun 11, 2019 09:05 pm | By: National Mindset News

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कहते है लोग देश में सस्ती लोकप्रियता और सामाजिक अपराध करने की परवर्ती का ज़माना अब चला गया, किंतु शायद यह सिर्फ़ नेताओ के लिए ख़त्म हुआ है क्योंकि यह हथकंडा नेता अपनाते थे, जनता बेख़बर होती थी।समय बदला राजनीति बदली देश बदला रजनीतिज्ञो को समझ आ गया वोटर अब वो वोटर नहीं रहे जो सिर्फ़ जाति, समुदाए और तुष्टिकरन पर वोट डाल आयें, और उसपर मीडिया का ख़तरा यह की अगर एक भी लोकप्रियता का हथकंडा पकड़ा गया तो जनता तो कूटेगी ही जेल की रोटी अलग। जेएनयू के कनहेय्या से लेकर राहुल गांधी तक को जनता ने इस खेल में छक्के छुड़ा दिये हैं।


सुप्रीम कोट ने तथाकथित पत्रकार प्रशान्त कनौजिया को रिहा करने के आदेश दये  है दरअसल यह समझना होगा अपराध तो हुआ है, कानून ब्यनस्था को चुनौती भी दी गय़ी है केय़ोकि य़ोगी आदित्य़ नाथ य़ोगी भी है, जिनका स्वय़ं से किय़े गये सन्य़ास की मर्य़ादा भंग होती है वही दूसरी ओर सूबे के लोकप्रिय़ मंत्री होने के साथ लोगो मे अशांति और असंतोष बढता है एसी भीड़ हर समय़ लाँ आर्डर को चुनौती दे रही होती है । फिर भी न्य़ाय़ालय़ के प्रथम द्रस्ढा कानून मे अपराधी को झोड़ दिय़ा जाता है। दरअसल समझते है इस माजरे को रातो रात चर्चा मे आने का अब यह बीड़ा उठाया है, बुधिजीवियो और पत्रकारों ने, जिन्हें बहुत जल्दी तेज़ गति से चर्चा पानी होती है। बदले ज़माने में अपराध के लिए आपरिधिक प्रवृति को बंदूक़ और गोला बारूद की ज़रूरत नहीं होती, बेतहाशा उग आए चैनल और बाढ़ की जल प्रवाह के समान उमड़ती घूमड़ती सोसल मीडिया में एक मुट्टी बारूद मिलाना होता है।बुधिजीवि और पत्रकार बड़ी आसानी से यह कार्य कर डालते है, जो रजनितज्ञ अब नहीं कर सकते। आप इस घटना को इस तरह से समझने का प्रयास करें, अभी अमिताभ बच्चन का ट्विटर एक आतंकवादी द्वारा हेक हो जाता है, एक आतंकी अपनी बात इस माध्यम से लोगों तक पहुँचा देता है। अब सभी जानते यह एक आतंकवादी हरकत है ठीक इसी तरह एक मानसिक रूप से विक्षिप्त महिला के प्रलाप से सभी वाक़िफ़ हैं और किसी ने अपने चैनल या अन्य मीडिया ने इस झूठे ख़बर पर चर्चा उचित नहीं समझा। ऐसे में पत्रकारिता के बहाने एक व्यक्ति इस ख़बर को ब्रेकिंग न्यूज़ की तरह अपने चैनल पर पेश करता है।सोसल मीडिया के माध्यम से अपराध के लिए प्रशांत कनौजिया इसी लड़ी की एक कड़ी है। प्रशांत २०१५-१६ बैच में IIMC का संस्थान से बर्खास्त किया हुआ छात्र है, जिसे लिखित मफिनामे के बाद डिग्री दी गई थी। प्रशांत से ठीक जूनियर इसी संस्थान के छात्र राघवेंद्र का कहना है, इसमें पत्रकार जैसी कोई बात नहीं थी, यह शुरू से ही रातों रात चर्चे में आना चाहता था। साथियों को जाती समुदय के नाम पर उकसाना, शिक्षकों को गालियाँ देना, संस्थान प्रमुख को अदालत में ले जाने की धमकी देना जैसे अपराध ही इसकी प्रविरती रही है। आज इसने अगर एक विक्षिप्त महिला के अनर्गल प्रलाप को अपनी ब्रेकिंग न्यूज़ स्टोरी बनाई तो यह एक घटना नहीं एक सोची समझी रणनीति के तहत किया गम्भीर अपराध है, ।

भारत के अन्दर खबरो का प्लान्ट किया जाना कोई नयी बात नही है। कभी कभी इन दोषियो को पकड़ा भी गया है। और कभी कभी इस तरह की साजिशो ने खुद ही बिना नुकसान के दम तोड़ दिया। किन्तु दो दिनो से प्रशान्त कनौजिया पर उठे सवालो ने मीडिया और बुद्धि जीवियो को झकझोर दिया क्योकि यह खबरो को प्लांट करने वाले नही बल्कि आधार विहीन और मानसिक रूप से दिवालिया एक महिला के अनर्गल प्रलाप को अपने मीडिया माध्यम से देश मे सनसनी फैलाने का मामला है। आज सरकार की नीतियो के खिलाफ खड़े चैनल भी एसे वीडियो को दिखाना अनावश्क और कानूनी दोषयुक्त मानत रहे हे।किन्तु एक ब्यक्ति अगर अपने रोष.और पागलपन में इन झूठी खबरो को अपने चैनल पर सजाकर पेश करता है और स्वय़ं को पत्रकार कहता है। और कुछ पत्रकार उतके पक्ष मे टिप्पणिय़ां करते है तो य़ह एक गंभीर विषय़ है उस मानसिक रूप से डिस्टर्ब उस महिला से अधिक गंभीर विषय़ देश के कुछ पत्रकारो के अनर्गल प्रलाप और स्वय़ं को इस इस घटना से अलग दोषी प्रशांत का समर्थन है। दिलचस्प य़ह कि इनमे से कोई पत्रकार इस वीडिय़ो को सही मानते और न ही इसे अपने चैनल अथवा पर्सनल सोशल मीडिय़ा पर चलाय़ा किन्तु प्रशांत के कुक्रत्य़ खबर पर हांथ मे मोमब्त्ती लेकर खड़े हो गय़े । ट्वीटर पर एक झूठी घटना पर बनी खबर पर टिप्पणी लिख दी कुछ पत्रकारो के नाम लिए बिना मै उनकी टिप्पणी जरूर शामिल करना चाहूँगा ।

 हमारे एक मित्र लिखते है ,पत्रकारो का काम नेता की सुरक्षा नही है। एक कहते है ,य़ह तो पत्रकारिता पर भाजपा सरकार का आघात है ।

मै आपको बता दूँ न ब्य़क्तिगत रूप से न ही सार्वजनिक रूप से य़े पत्रकार इस घटना और वीडिय़ो का समर्थन करते है ।

 अब आइए हम आपको प्रशांत के विषय़ मे बताते है जिसने एक अनर्गल प्रलाप को एक मठाधीश संय़ासी और देश के लोकप्रिय़ मुख्य़ंत्री को निशाना बनाकर देश मे समसनी फैलाने का प्रय़ास किय़ा है क्य़ोकि य़ह समझना होगा य़ोगी सिर्फ एक मुख्मंत्री नही आजीवन संय़ासी के प्रण से बंधे खुद मठ के ग्रुप भी है जिनके विषय़ मे इस तरह की घटना स्वय़ं मे जिय़े मानहानि का विषय़ है । साथ ही करोड के प्रदेश से ऐसे मुख्यमंत्री जिनके एक सभा मे पहुचने भर से लाखो की भीड़ इकट्ठी हो जाती है ।     


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