सपने कितने ही सुहाने क्यों न हों, तब तक पूरे नहीं होते जब तक साथियों की सोच काम को लेकर एक जैसी नहीं होती है - प्रधानमंत्री

Published : May 25, 2019 07:53 pm | By: National Mindset News

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रपति से मिलकर अपना और अपने कैबिनेट सहयोगियों का इस्तिफा सौंपा और 16वीं लोकसभा को भंग करने की सिफारिश की जिसे स्वीकार करते हुए राष्ट्रपति ने लोकसभा भंग कर दी और नयी सरकार के गठन होने तक प्रधानमंत्री को पद पर बने रहने का निर्देश दिया। इससे पहले पीएम ने प्रधानमंत्री कार्यालय के स्टाफ से बात की। पीएम ने पीएमओ में कार्यरत कर्मचारियों की जमकर तारीफ की। पीएम ने कहा कि कोई भी परिणाम तब तक नहीं मिलता, जब तक कोई समर्पित टीम नहीं मिलती है। सपने कितने ही सुहाने क्यों न हों, तब तक पूरे नहीं होते जब तक साथियों की सोच काम को लेकर एक जैसी नहीं होती है। पीएम ने बीज गणित के फॉर्म्युले का जिक्र कर पीएमओ कर्मियों की ऊर्जा के बारे में बताया।


पीएम ने कहा, पांच साल की अखंड एकनिष्ठ साधना, जिसका लक्ष्य देश के समान्य व्यक्ति के जीवन में आशा और बदलाव संचारित करना।'इन सब कामों का क्रेडिट तो पीएम को मिलता है। टीवी-अखबार में पीएम दिखता है, तारीफ भी पीएम को मिलती है, लेकिन जब तक कोई समर्पित टीम नहीं होती है, तब तक सपने कितने ही सुहाने और संकल्प कितने ही दृढ़ क्यों न हों, इरादे कितने ही नेक क्यों न हों, परिणाम मिलना मुश्किल होता है। परिणाम तब मिलता है, जब पीएम की सोच और साथियों की सोच एक साथ मिलती हो। मोदी ने कहा, 'पांच साल तक, जिस इरादे से 2014 में चले थे 201 तक हमने अपने मार्ग में जरा भी भटकाव नहीं आने दिया। हम समर्पण बढ़ाते गए। लोगों की अपेक्षाओं के कारण काम का दबाव बढ़ता गया। लोगों के विश्वास के कारण जब दबाव बढ़ता है तो वह ऊर्जा में बदल जाता है। पीएम ने वहां मौजूद पीएमओ कर्मियों से कहा,'आपने भी महसूस किया होगा कि पूर्व के कार्यकाल की अपेक्षा आपको भी परिवर्तन महसूस हुआ होगा। वह ऊर्जा लोगों की अपेक्षा से ही आई है।पीएम ने कहा, 'बीज गणित में पढ़ाते थे , जब इसे खोलते थे तो कहते थे  यह कहां से आया है? ये  जो ब्रेकिट में से एक्स्ट्रा एनर्जी पैदा हुई, ये विश्वास की एनर्जी है। पीएम ने पीएमओ कर्मियों से कहा, 'मेरा अब तक का अनुभव है कि आप लोगों ने मेरी अपेक्षा से ज्यादा परिणाम दिया है। समय की कल्पना से पहले दिया है। सुचारू ढंग से किया और सुचिता के साथ दिया है। यह पूरी टीम अभिनंदन की अधिकारी हैं। पीएम ने कहा कि हम नहीं चाहते कि प्रधानमंत्री कार्यालय इफेक्टिव हो, हम चाहते हैं कि पीएमओ एफिशंट हो। एफिशंसी के परिणाम की मात्रा बहुत अधिक होती है। 'आपमें से कई लोग हैं, जिन्होंने बहुत प्रधानमंत्री और मंत्री देखे हैं, लेकिन मैं पहला प्रधानमंत्री हूं, जिसने आपको देखा है। आपने मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं होने दिया, काम का बोझ मुझ पर नहीं आने दिया। आपके विचारों ने मुझे ताकत दी है।


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