फर्जी है बीजेपी के खिलाफ पूर्व सैन्य प्रमुखों के नाम से राष्ट्रपति को लिखी चिठ्ठी, कई अधिकारियों ने किया चिठ्ठी से इनकार।

Published : Apr 14, 2019 07:10 pm | By: National Mindset News

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सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति को लिखी चिट्ठी पर बवाल शुरू हो गया है। कई पूर्व सैन्य अधिकारियों ने राष्ट्रपति को ऐसी कोई भी चिट्ठी लिखने से इनकार किया है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा था कि सेना के 3 पूर्व प्रमुखों समेत 156 पूर्व सैन्य अधिकारियों ने सेना के राजनीतिक इस्तेमाल को लेकर राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखी है, लेकिन कई अफसरों ने ऐसी किसी भी चिट्ठी से इनकार किया है।


पूर्व आर्मी चीफ एस.एफ रॉड्रिग्स ने ऐसी किसी भी चिट्ठी पर हस्ताक्षर करने से इनकार किया है। हैरानी की बात यह है कि पूर्व सैन्य अधिकारियों के नाम से वायरल हो रही चिट्ठी में सबसे पहला नाम जनरल रॉड्रिग्स का ही बताया जा रहा था। उन्होंने इस खबर को फेक न्यूज का क्लासिक उदाहरण करार दिया। उनके अलावा एयर चीफ मार्शल एनसी सूरी ने भी ऐसी किसी चिट्ठी पर साइन करने की बात से इनकार किया है। वहीं, राष्ट्रपति भवन के सूत्र भी ऐसी कोई चिट्ठी मिलने से इनकार कर रहे हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया जा रहा था कि पूर्व सैन्य अधिकारियों की ओर से राष्ट्रपति को चिट्ठी लिखकर सेना के राजनीतिक इस्तेमाल और 'मोदी की सेना' जैसी टिप्पणियों पर आपत्ति जताई है। इस चिट्ठी को कांग्रेस ने राजनीतिक हथियार बनाने की कोशिश की लेकिन कांग्रेस का ये दांव उल्टा पड़ गया। इसी तरह पहले भी वैज्ञानिकों, फिल्मकारों, कलाकारों और लेखकों की चिठ्ठियां सामने आ चुकी हैं जिसमें आम जनता से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से बीजेपी को वोट न देने की अपील की गयी है। देश के 150 से अधिक वैज्ञानिकों ने मॉब लिंचिंग से जुड़े लोगों को वोट न देने की अपील की थी। इसमें कहा गया था कि असहमति रखने वाले लोगों को प्रताड़ित करना, जेल में बंद करना, हत्या कर देना जैसी घटनाएं हो रही हैं। इससे पहले 100 से अधिक फिल्मकारों और 200 से अधिक लेखकों ने भी देश में नफरत की राजनीति के खिलाफ मतदान करने की अपील की थी। भारतीय लेखकों के संगठन इंडियन राइटर्स फोरम की ओर से जारी अपील में लेखकों ने लोगों से विविधता और समान भारत के लिए वोट करने की अपील की थी। इन लेखकों में गिरिश कर्नाड, अरुंधती रॉय, अमिताव घोष, नयनतारा सहगल और रोमिला थापर जैसे वामपंथी विचारधारा वाले लेखक शामिल हैं। उनका कहना था कि ‘लोगों को बांटने की राजनीति के खिलाफ वोट करें, असमानता के खिलाफ वोट करें, हिंसा, उत्पीड़न और सेंसरशिप के खिलाफ वोट करें। साथ ही देश के 100 से अधिक फिल्म निर्माताओं ने लोकतंत्र बचाओ मंच के तहत एकजुट होते हुए लोगों से सीधे तौर पर भाजपा को वोट न देने की अपील की थी। इनमें आनंद पटवर्धन, एसएस शशिधरन, सुदेवन, दीपा धनराज, गुरविंदर सिंह जैसे फिल्मकार भी शामिल हैं। ये सभी अपनी वामपंथी विचारधारा के लिए जाने जाते हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि एक खास विचारधारा के लोग जो बुनियादी तौर पर बीजेपी के विरोधी हैं, वे बड़ी चालाकी से किसी खास दल के लिए वोट करने की अपील के बजाए लोगों से बीजेपी के खिलाफ वोट करने की अपील कर रहे हैं। और ऐसा प्रचारित किया जा रहा है जैसे देश का पूरा बुद्धिजीवी वर्ग ही बीजेपी के खिलाफ है। लेकिन पूर्व सैन्य अधिकारियों की चिठ्ठी ने इनके शातिर मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

 

 

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