क्या लोकसभा चुनाव के बाद बिखर जाएगी कांग्रेस?

Published : Apr 20, 2019 07:16 pm | By: National Mindset News

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इन दिनों कांग्रेस पार्टी के अंदर कुछ सुलग सा रहा है जो चुनाव की गहमागहमी में साफ दिख नहीं पा रहा। लेकिन एक महीने के अंदर दो दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं का पार्टी छोड़ देना, बताता है कि पार्टी के अंदर सबकुछ ठीक नहीं है। पहले टॉम वडक्कम और अब प्रियंका चतुर्वेदी। क्या इसे जहाज के डूबने से पहले की भगदड़ कहना ठीक होगा। वैसे भी कांग्रेस आज एक परिवार की जेबी पार्टी से ज्यादा कुछ रह भी नहीं गयी है। जो लोग दावा करते हैं कि ये 134 साल पुरानी पार्टी की विरासत है वे गलतफहमी में हैं।


1885, यानी जवाहर लाल नेहरू के जन्म से चार साल पहले ए.ओ. ह्यूम, दादाभाई नौरोजी और दिनशॉ वाचा ने इंडियन नेशनल कांग्रेस की स्थापना की थी। लेकिन अपनी स्थापना के बाद ही कांग्रेस पार्टी नरम दल और गरम दल के रूप में बंट गई और फिर पिछले 134 साल के दौरान कांग्रेस लगातार टूटती रही। वर्तमान में जो कांग्रेस है वो गांधी, नेहरू, मौलाना आजाद और पटेल की कांग्रेस नहीं है। यह इंदिरा गांधी द्वारा कांग्रेस से अलग होकर बनाई गई कांग्रेस पार्टी है। पहली बार इसका जन्म 12 नवंबर 1969 को हुआ जब कांग्रेस पार्टी ने प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को पार्टी से बर्खास्त कर दिया था और उन्होंने अपनी एक अलग पार्टी कांग्रेस-(आर) की स्थापना की थी। नेहरू-पटेल-आजाद की कांग्रेस का चुनाव चिन्ह जोड़ा बैल था। लेकिन जब इंदिरा गांधी ने अलग पार्टी बनाई तो उन्हें यह चिन्ह नहीं मिला। तकनीकी तौर पर उसी दिन से इस पार्टी का रिश्ता पुरानी कांग्रेस से खत्म हो गया। यही वजह है कि इंदिरा गांधी ने गाय-बछड़े को अपना सिम्बल बनाया था। उस समय माना जाता था कि कि गाय-बछड़ा इंदिरा और संजय गांधी के प्रतीक थे। इमरजेंसी के बाद कांग्रेस (आर) का फिर से विभाजन हुआ। 1977 के चुनाव में कांग्रेस (आर) की हार के बाद पार्टी नेताओं ने खुल कर इंदिरा का विरोध किया, जिससे पार्टी दो हिस्से में बंट गई। विरोध झेलने में इंदिरा गांधी को परेशानी होती थी इसलिए उन्होंने अलग पार्टी बनाई जिसका नाम रखा कांग्रेस (आई) मतलब इंदिरा कांग्रेस। इमरजेंसी के काले कारनामों की वजह से पार्टी का सिम्बल गाय बछड़ा बदनाम हो चुका था। इस वजह से इंदिरा कांग्रेस को फिर से नया चुनाव-चिन्ह लेना पड़ा। इस बार इंदिरा ने पंजे के निशान को चुना। इंदिरा गांधी ने इलेक्शन कमीशन पर दबाव डाला और कांग्रेस आई का नाम बदलकर फिर से इंडियन नेशनल कांग्रेस करवा दिया और 1981 से इंदिरा कांग्रेस का नाम इंडियन नेशनल कांग्रेस हो गया। यह एक ऩई पार्टी थी लेकिन नाम पुराना था। इस हिसाब से वर्तमान कांग्रेस की आयु इंडियन नेशनल कांग्रेस के नामकरण के बाद से 38 साल होनी चाहिए। आज जो कांग्रेस है यह सोनिया-राहुल की कांग्रेस है। यह पार्टी सोनिया-राहुल की निजी सम्पत्ति है। इस पार्टी की राजनीति सोनिया गांधी के चरणों से शुरू होकर राहुल गांधी की वंदना में खत्म होती है। ऐसे में लगातार कमजोर होती जा रही पार्टी को एक मजबूत और दूरदर्शी नेतृत्व की जरूरत है जो राहुल गांधी में कहीं से नजर नहीं आती। दूसरी लाइन में चापलूस और नाकारा नेताओं की फौज है जिनसे कोई उम्मीद हो भी नहीं सकती। तो ये लोकसभा चुनाव, कांग्रेस की अंतिम परीक्षा है। इसमें यदि कांग्रेस फेल हुई तो नेतृत्व परिवर्तन की आवाज उठाने की किसी में हिम्मत है नहीं, फिर पार्टी का विभाजन होना ही तय है।    


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