नेताओं की जहर उगलती जुबान, चुनाव आयोग परेशान।

Published : Apr 16, 2019 07:35 pm | By: National Mindset News

नेताओं की जहर उगलती जुबान, चुनाव आयोग परेशान।

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इसबार के लोकसभा चुनाव में नेताओं ने भाषा की हर मर्यादा पार कर दी है, और इसमें सभी दल के नेता शामिल हैं। ऐसा अचानक हो रहा है या फिर सोची-समझी रणनीति के तहत। लोग सोच-समझकर सनसनी फैलाने वाले बयानों को एक नया हथियार बना रहे हैं। चुनाव आयोग की चुप्पी भी इन नेताओं की बदजुबानी को शह दे रही है। आखिरकार देर से ही सही आयोग ने कुछ सख्ती दिखाते हुए चार बड़े नेताओं पर विवादित बयान देने के मामले में अलग अलग अवधि के लिये चुनाव प्रचार करने पर रोक लगा दी है।


सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चुनाव आयोग को अचानक अपनी शक्तियां याद आने लगी हैं। दो दिन पहले तक शीर्ष अदालत के सामने अपनी सीमित शक्तियों का रोना रो रहे आयोग ने अब दनादन चाबुक फटकारना शुरू कर दिया है। पिछले दो दिन के अंदर आयोग ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, बीएसपी की मुखिया मायावती, केन्द्रीय मंत्री मेनका गांधी और समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को विवादित बयान देने के मामले में अलग अलग अवधि के लिये चुनाव प्रचार करने से रोक दिया है। यह पहला मौका है जब किसी मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री को प्रचार अभियान में हिस्सा लेने पर देशव्यापी रोक लगायी गयी है। आयोग ने सोमवार को इस बारे में आदेश जारी कर मेनका गांधी को 16 अप्रैल की सुबह दस बजे से अगले 48 घंटे तक देश में कहीं भी किसी भी प्रकार से चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने से रोक दिया है। इसी तरह एक अन्य आदेश में आजम खान को भी मंगलवार सुबह दस बजे से अगले 72 घंटे तक चुनाव प्रचार करने से रोका गया है। मेनका गांधी उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर संसदीय क्षेत्र से भाजपा की और आजम खान रामपुर संसदीय क्षेत्र से सपा के उम्मीदवार हैं। आयोग ने मेनका गांधी को एक संप्रदाय विशेष के बारे में की गयी विवादित टिप्पणी को लेकर आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी माना है, इसी तरह आयोग ने आजम खान के भाजपा की प्रत्याशी जयाप्रदा के बारे में रविवार को दिये गये आपत्तिजनक बयान को चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन माना है। आयोग ने इससे पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 72 घंटे और और बसपा अध्यक्ष मायावती को 48 घंटे तक देश में कहीं भी प्रचार करने से रोकने का सोमवार को ही आदेश जारी किया था। उच्चतम न्यायालय ने चुनाव प्रचार के दौरान मायावती और योगी आदित्यनाथ के कथित रूप से विद्वेष फैलाने वाले भाषणों का सोमवार को संज्ञान लिया था और निर्वाचन आयोग से पूछा था कि उसने इनके खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई की है। इसी के बाद आयोग हरकत में आया और दनादन इन चार बड़े नेताओं के खिलाफ आदेश जारी कर दिए। लेकिन चार बड़े नेताओं पर कार्रवाई का कोई खास असर दूसरे नेताओं पर नहीं दिख रहा है। एक दूसरे के खिलाफ आग उगलने का सिलसिला जारी है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर हमला करने की धुन में देश के सारे मोदियों को चोर बता देने से बवाल खड़ा हो गया है। वहीं केन्द्रीय मंत्री गिरिराज सिंह बेगूसराय में हिन्दू मुस्लिम का राग अलापकर हिन्दुओं को गोलबंद करने में लगे हैं। चुनाव आयोग समझ ही नहीं पा रहा कि किसके खिलाफ क्या कार्रवाई करे। पार्टियां अपने नेताओं को बदजुबानी करने से रोक पाएंगी, इसकी उम्मीद करना ही बेमानी है। नेताओं को यदि किसी तरह की कार्रवाई का कोई डर ही नहीं है तो फिर अंतिम फैसला अब जनता की अदालत में ही तय होगा।


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