'जनेऊधारी' राहुल गांधी ने मुस्लिम-ईसाई बहुल वायनाड में ढूंढा सुरक्षित ठिकाना।

Published : Apr 01, 2019 08:07 pm | By: National Mindset News

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इसबार दो जगहों से लोकसभा का चुनाव लड़ेंगे। अपनी पारंपरिक सीट अमेठी के अलावा केरल के वायनाड से। कांग्रेस नेता एके एंटनी और रणदीप सुरजेवाला ने बताया है कि दक्षिण भारत के तीन राज्यों केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु से लगातार मांग उठ रही थी कि राहुल गांधी दक्षिण भारत की भी एक सीट से चुनाव लड़ें, इसलिए कांग्रेस अध्यक्ष ने अमेठी के अलावा केरल के वायनाड से चुनाव लड़ने का फेसला किया है।


लेकिन सवाल ये उठता है कि राहुल गांधी के वायनाड सीट से ही चुनाव लड़ने की वजह क्या है? यूपी जैसे महत्‍वपूर्ण राज्‍य में बीजेपी को फ्रंटफुट पर चुनौती देने की बात करने वाले राहुल गांधी केरल के वायनाड क्‍यों चले गए, जहां बीजेपी की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। मामला ‍सिर्फ इतना सा नहीं है कि अमेठी में इस बार स्‍मृति इरानी से कड़ी चुनौती मिलने के कारण राहुल ने एक सुरक्षित सीट का रुख ‍किया है। बीजेपी इस सवाल पर जिस तरह से राहुल को घेर रही है और वायनाड सीट का जिस तरह बखान किया जा रहा है, वह राहुल गांधी और कांग्रेस की साफ्ट हिंदुत्‍व वाली राजनीति को काफी नुकसान पहुंचा सकता है। वायनाड सीट मुस्लिम-ईसाई बहुल है, जिसकी वजह से 'जनेऊधारी' राहुल गांधी की सॉफ्ट हिंदुत्व वाली छवि पर सवाल उठ रहे हैं। 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस बुरी तरह से हारी थी और बीजेपी की बड़ी जीत में यूपीए सरकार के भ्रष्टाचार के अलावा हिंदुत्व की राजनीति का अहम योगदान रहा था। पिछले कुछ सालों से राहुल गांधी भी कांग्रेस की सेक्युलर छवि को दरकिनार करते हुए सॉफ्ट हिंदुत्व के रास्ते पर चल रहे हैं। जनेऊ धारण करने से लेकर गाय तक, सब कुछ राहुल गांधी ने अपना लिया और कुछ जगहों पर उन्हें इसका फायदा भी मिल रहा था। ऐसे में यकायक अमेठी के अलावा वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ने की घोषणा ने सबको हैरान कर दिया है। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने इस सीट का चुनाव इसलिए किया है क्‍योंकि वायनाड अल्‍पसंख्‍यक बहुल सीट है। अमेठी में उनकी जड़ें हिलने लगी हैं। इस कारण असहाय व असुरक्षित राहुल गांधी अमेठी को छोड़कर दक्षिण भारत के वायनाड चले गए हैं। दूसरी ओर इस फैसले को कांग्रेस की तरफ से दक्षिण भारत, खासकर केरल में अपने जनाधार को मजबूत करने के प्रयास के तौर पर देखा जा रहा है, जहां लोकसभा की 20 सीटें हैं और इससे लगते तमिलनाडु में लोकसभा की 39 और कर्नाटक में 28 सीटें हैं। और वायनाड सीट कांग्रेस की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है। साथ ही कांग्रेस के शीर्ष नेताओं का दक्षिण से चुनाव लड़ने का पुराना इतिहास रहा है। 1978 में इंदिरा गांधी ने कर्नाटक के चिकमगलूर से उपचुनाव जीता था। 1980 में भी इंदिरा गांधी ने रायबरेली के अलावा आंध्र प्रदेश के मेढक से जीत दर्ज की। 1999 में सोनिया गांधी अमेठी के अलावा कर्नाटक के बेल्लारी से चुनाव लड़ीं और वहां बीजेपी की सुषमा स्वराज को हराया। इसलिए राहुल गांधी का दक्षिण जाना कोई अजूबा तो नहीं है लेकिन अल्पसंख्यक बहुल सीट के चुनाव ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं।


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