केरल में RSS की ताकत के सहारे वाम किले को ढहाने में जुटी बीजेपी।

Published : Mar 18, 2019 01:51 pm | By: National Mindset News

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केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 75 साल हो चुके हैं। हिन्दू स्वाभिमान की रक्षा और धर्मांतरण के मुद्दे पर संघ ने केरल के गांव गांव में जागरुकता फैलायी है और लोगों के बीच अपनी पैठ मजबूत की है। हालांकि सियासी तौर पर उसकी आनुसंगिक संस्था बीजेपी को यहां अधिक सफलता भले न मिली हो, लेकिन सांस्कृतिक रूप से संघ काफी आगे बढ़ा है। राजनीतिक स्तर पर भी बीजेपी लगातार अपनी स्थिति मजबूत करती जा रही है। और अब टॉम वडक्कन जैसे स्थापित और जनाधार वाले नेता का कांग्रेस छोङकर बीजेपी में आने से पार्टी की ताकत बढनी तय है।


पिछले विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने न केवल एक सीट हासिल करके केरल में अपना खाता खोला बल्कि 2011 विधानसभा चुनाव के मुक़ाबले अपना वोट शेयर सौ फ़ीसदी बढ़ा लिया। पाटी को पिछले चुनाव में 15 प्रतिशत से अधिक वोट मिले जबकि, 2011 में इसे सिर्फ़ 7 प्रतिशत वोट हासिल हुए थे। वहीं सीपीएम और एलडीएफ के वोट शेयर दो प्रतिशत कम हुए। बीजेपी ने पिछले कुछ वर्षों में यहां अपनी राजनीतिक जमीन तेजी से मजबूत की है और लगातार कोशिश कर रही है कि केरल में लेफ्ट के मजबूत किले को ढहा सके और कांग्रेस को हाशिए पर धकेल दे। बस संघ की तैयार की हुई जमीन पर इसे अपनी फसल उगानी है। टॉम वडक्कन जैसे स्थापित और जनाधार वाले नेता का कांग्रेस छोङकर बीजेपी में आना इस फसल पर बारिश की बौछार का काम कर सकती है।

केरल में अभी आरएसएस का आधार 4,500 शाखाएं हैं। इसके इलावा राज्य में संघ के 500 स्कूल हैं। संघ का कहना है कि राज्य में हम सांस्कृतिक परिवर्तन चाहते हैं और इसमें हमें कामयाबी मिली है, लेकिन सीपीएम नहीं चाहती कि लोगों के हितों की रक्षा और महिलाओं तथा अन्य की सुरक्षा और उनकी समस्या पर संघ स्वयंसेवक ध्यान दें। क्योंकि संघ के सेवालय से होकर भाजपा की राह भी गुजरती है और लोकहित की भी। इसलिए जिन लोगों को संघ में अपना हित दिखेगा, वह भाजपा के प्रति भी विश्वास रखने लगेंगे। इससे आने वाले दिनों में भाजपा को वामपंथियों के किले को ढहाने में देर नहीं लगेगी। संघ को साफ दिख रहा है कि केरल में 75 साल की अथक मेहनत की फसल काटने का सही समय आ चुका है और हालात अभी नहीं तो कभी नहीं के स्तर पर पहुंच चुके हैं। इस लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए संघ ने पिछले दो तीन सालों में यहां अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और बङी संख्या में कार्यकर्ताओं को अपने साथ जोङा है। दो साल पहले तक केरल में संघ के 30,000 से ज्यादा सक्रिय कार्यकर्ता थे, जिनकी तादाद तेजी से बढी है। इसके साथ ही केरल में भाजपा भी अपनी ताकत स्थापित करने में जुटी है, जिसकी मजबूती संघ की फैलती शाखाओं के साथ जुड़ी है। 


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