लोकसभा चुनाव 2019 : पंजाब में AAP का अस्तित्व खतरे में, कांग्रेस और अकाली-बीजेपी गठबंधन के बीच सीधी टक्कर

Published : May 16, 2019 07:00 pm | By: National Mindset News

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पंजाब की सभी 13 सीटों पर 19 मई को लोकसभा चुनाव के सातवें और आखिरी चरण में वोट डाले जाएंगे। 2014 से पहले तक पंजाब में आमतौर पर लड़ाई कांग्रेस और अकाली-बीजेपी गठबंधन के बीच होती रही थी। यही दोनों दल बारी-बारी से सियासी जंग फतह करते रहे, लेकिन 2014 में आम आदमी पार्टी ने पंजाब में अपनी दमदार मौजूदगी दर्ज करवाते हुए 4 सीटों पर कब्जा किया। यही वजह है कि इस बार के लोकसभा चुनाव में सभी की निगाहें राज्य में आम आदमी पार्टी के प्रदर्शन पर टिकी हैं। पंजाब में लोकसभा चुनाव के नतीजे ही दिल्ली से बाहर AAP का सियासी भविष्य तय करने वाले हैं।


इस बार पंजाब में आम चुनाव का माहौल 2014 से एकदम उलट है। पिछले चुनाव में पंजाब में आम आदमी पार्टी दमदार विकल्प बनकर उभरी थी। 24 फीसदी से ज्यादा वोट और 4 सीटें जीतकर उसने कांग्रेस और अकालियों की जड़ें हिला दी थीं। आप का यह प्रदर्शन 2018 के विधानसभा चुनाव में पूरी तरह तो नहीं लेकिन कुछ हद तक बरकरार रहा, और उसने 20 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रहते हुए अकाली दल को तीसरे नंबर पर खिसका दिया। लेकिन तीन सालों में स्थितियां काफी बदल गयी हैं और पंजाब में आप का संगठन बुरी तरह बिखर चुका है। पंजाब की 13 में से एकमात्र संगरूर सीट पर आप के भगवंत मान थोड़ी टक्कर देते दिख रहे हैं। 13 में से 9 सीटों पर कांग्रेस का अकाली-भाजपा गठबंधन से सीधा मुकाबला है। 3 सीटों पर पंजाब डेमोक्रेटिक अलायंस टक्कर दे रही है। कांग्रेस की कमान पूरी तरह कैप्टन अमरिंदर सिंह के हाथ में है, लेकिन 84 सिख दंगों पर कांग्रेस नेताओं के बयान से सिख मतदाता काफी नाराज हैं और अकाली-बीजेपी ने इसे मुद्दा बना रखा है। इसके अलावा नशे के साथ-साथ बेरोजगारी भी अहम मुद्दा है। दोनों को लेकर जनता बेहद नाराज है। सूबे में भाजपा का संगठन ज्यादा मजबूत नहीं रहा है लेकिन गुरदासपुर सीट पर सनी देओल के आने से भाजपा की गूंज सुनाई देने लगी है। कांग्रेस और अकाली, दोनों की नजर आप के वोटों पर टिकी है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को लगभग 12 फीसदी वोट और 5 सीटों का नुकसान हुआ था। तब अकाली दल का भी 8 फीसदी वोट खिसका था। अकाली दल को खोया जनाधार फिर से पाना है। कैप्टन ने बादल परिवार को पवित्र ग्रंथ की बेअदबी के मसले पर घेर रखा है। सुखबीर को फिरोजपुर सीट पर राहत है लेकिन पत्नी केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर को बठिंडा में कांग्रेस के राजा वड़िंग और पीडीए के सुखपाल खैहरा से कड़ी चुनौती मिल रही है। कैप्टन के लिए पटियाला में पत्नी परनीत कौर को जिताना नाक का सवाल बना हुआ है। आनंदपुर साहिब में कांग्रेस के मनीष तिवारी और अकाली दल के प्रेमसिंह चंदूमाजरा में कांटे की टक्कर है। बीजेपी की परंपरागत सीट रही गुरदासपुर सन्नी देओल के मैदान में आने से बीजेपी को वापस मिलने की उम्मीद बढ़ी है। इस पूरी लड़ाई में संगरूर के अलावा आम आदमी पार्टी कहीं भी मुकाबले में नहीं दिख रही। सिर्फ पांच सालों के भीतर एक संगठन का इतनी तेजी से उभरकर फिर बिखऱ जाना, इसके नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े करता है।


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