26 साल पुरानी जेट एयरवेज हुई बंद, 20 हजार से ज्यादा कर्मचारियों का भविष्य अधर में।

Published : Apr 18, 2019 03:35 pm | By: National Mindset News

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अपनी आखिरी उड़ान के साथ देश की एक और एयरलाइंस ने दम तोड़ दिया। जेट एयरवेज ने बुधवार रात से अस्थाई तौर पर अपनी सभी उड़ानों को रद्द कर दिया है क्योंकि कंपनी के पास पैसे नहीं हैं और बैंकों ने उसे और कर्ज देने से इनकार कर दिया है। 26 साल से अपनी सेवाएं दे रही जेट एयरवेज को अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं।


अपने अच्छे दिनों में जेट ने एक दिन में 650 उड़ानों तक का परिचालन किया है। जेट की उड़ानें रुक जाने के बाद अब कंपनी के 16,000 स्थाई और 6,000 अनुबंधित कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल खड़े हो गये हैं। पिछले एक दशक में किंगफिशर के बाद कामकाज बंद करने वाली जेट भारत की दूसरी कंपनी बन गई है। विजय माल्या की किंगफिशर साल 2012 में बंद हो गयी थी। अब जेट की सेवाएं दोबारा तभी शुरू हो पाएंगी जबकि कंपनी को एक नया खरीददार मिले जो इसे नए सिरे से शुरू कर सके। जेट ने अपनी उड़ानों का परिचालन जारी रखने के लिए एसबीआई की अगुआई वाले कर्जदाताओं से 983 करोड़ रुपये के इमरजेंसी फंड की मांग की थी जो खारिज कर दी गयी। जेट की आखिरी उड़ान उसी मुंबई में खत्म हुई, जहां से 5 मई, 1993 को मुंबई-अहमदाबाद के लिए जेट की पहली फ्लाइट ने उड़ान भरी थी। 2007 में 1,450 करोड़ रुपये की महंगी डील के साथ एयर सहारा खरीदने वाले नरेश गोयल ने नई कंपनी को जेटलाइट नाम दिया था। तब इस डील पर सवाल भी उठे थे। जानकारों को भी समझ में नहीं आया था कि 1450 करोड़ में सहारा ने बेचा क्या और जेट ने खरीदा क्या। यही वह बेहद कीमती डील थी जिससे जेट कभी उबर नहीं पाई। आखिरकार कंपनी 20,000 करोड़ रुपये के कर्ज में डूब गई। लेकिन अभी भी जेट के दोबारा उड़ान भरने की उम्मीद है। पिछले नवंबर तक जेट के पास बोइंग 777 और एयरबस ए330, सिंगल बी737 और टर्बोप्रॉप एटीआर के साथ कुल 124 विमान थे। कंपनी हर दिन करीब 600 फ्लाइट्स ऑपरेट कर रही थी। अंतरराष्ट्रीय और घरेलू उड़ानों के मामले में जेट एयरवेज देश की सबसे बड़ी एयरलाइंस में से एक थी। अब सवाल यह उठता है कि एयरलाइन की आर्थिक हालत इतनी खराब हुई कैसे। यात्रियों की कोई कमी नहीं है। सारी उड़ानें भरी होती थीं। किराया भी सस्ता नहीं था। फिर पैसे गये कहां। जब किंगफिशर बंद हुआ तो इसके लिए विजय माल्या को दोषी माना गया। आरोप लगे कि कंपनी का सारा पैसा उसने अपने शाही रहन सहन, ऐशो आराम और उल जलूल शौक पूरे करने में उड़ा दिए। लेकिन जेट के प्रबंधन पर तो ऐसे आरोप भी नहीं थे। फिर पैसे कहां गए, इसकी गहराई से जांच जरूरी है। क्या कंपनी के पैसों को कहीं और निवेश किया गया है या कोई और घोटाला है। जेट के बंद होने से देश में आम आदमी के लिए हवाई सेवा सुगम बनाने की मुहिम को भी झटका लगा है। अब घाटे के डर से दूसरे एयरलाइंस छोटे और कम भीड़भाड़ वाले सेक्टरों में अपनी सेवा शुरू करने से बचेंगे। निकट भविष्य में किसी नये एयरलाइन के शुरू होने की संभावना भी नहीं दिख रही। इसका सीधा असर देश के घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों पर पड़ना तय है।    


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