नोएडा पुलिस की अवैध उगाही गंभीर चिंता का विषय है...

Published : Jun 13, 2019 08:03 pm | By: National Mindset News

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जरा सोचिए, जिनके सहारे हमारी सुरक्षा है, सरकार ने जिन्हे हमारी सुरक्षा के लिए तैनात किया हुआ है, हम जिन पर भरोसा करके बुलाते हैं, जिनसे हमें सहयोग और न्याय की उम्मीद रहती है, अगर आम जनमानस उन्हीं से असुरक्षित हो जाए तो यह सोसाइटी के लिए बहुत गंभीर चिंता का विषय है। ऐसा कैसे हो जाता है यह सोचना भी पाप जैसा लगता है लेकिन यह सच है। जी हाँ, यह सच है। यह मामला नोएडा सेक्टर 44 के चौकी इंचार्ज के संरक्षण में चल रहे अत्यन्त घिनौने कार्य का है। वैसे तो पुलिस पर इस तरह के अनेक आरोप पहले भी लगते रहे हैं, जिसमें यह पाया गया है कि आपराधिक गिरोहों और आपराधिक कृत्यों में कई बार पुलिस के लोग भी संलिप्त होते हैं। लेकिन यहाँ तो पूरी योजना और सरगना ही पुलिस की है। इसमें नोएडा सेक्टर 44 के चौकी इंचार्ज सुनील शर्मा, तीन आरक्षी- मनोज, अजयवीर, देवेंद्र, पीसीआर 50 के तीन प्राइवेट ड्राइवर और 2 महिलाओं और कुछ अन्य के साथ कुल 15 लोग शामिल है। 



खबर यह है कि करीब 3-4 दिन पहले कुछ लोगों ने एसएसपी वैभव कृष्ण को सूचित किया कि सेक्टर 39 थाने के अंतर्गत सेक्टर 44 की पुलिस चौकी के बाहर एक ऐसा गैंग है जो लोगों पर झूठा रेप केस लगाकर धन उगाही करता है। आरोप के अनुसार, एक लड़की सेक्टर 44 पुलिस चौकी से जा रहे किसी व्यक्ति की कार को रुकवाकर उसकी कार मे बैठकर थोड़ी दूर चलकर ऐसी जगह उतरती थी, जहां सेक्टर 44 पुलिस चौकी की पीसीआर खड़ी होती थी। उतरने के बाद वह लड़की पीसीआर पर तैनात पुलिस कर्मियों से शिकायत करती थी कि उसके साथ ब्लात्कार और ज़ोर जबरदस्ती हुई है। इस सूचना पर पीसीआर पर तैनात पुलिसकर्मी उस लड़की और तथाकथित अभियुक्तों को चौकी लेकर आते थे जहां पर लड़की अपने कुछ परिचितों को बुलाती थी। इसके बाद उन व्यक्तियों को अभियुक्त बनाकर ब्लैकमेल किया जाता था। उसके बाद उन्हीं के बीच से एक मध्यस्थ निकल आता था जो समझौता के नाम पर लोगों से भारी भरकम रिश्वत की मांग करता था।

 

गौतमबुद्ध नगर के वरिष्ठ पुलिस एसएसपी वैभव कृष्ण को जब इसकी शिकायत मिली तो उन्होंने बड़ी कार्रवाई करते हुए सेक्टर 44 की पुलिस चौकी पर तीन आरोपियों को 50 हजार रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा। इसके बाद पूछताछ में इस पूरे गैंग पर पर्दाफाश हुआ। दरअसल ये वही वैभव कृष्ण हैं जिंहोने अपने काम करने की शैली से प्रशासनिक अमले में एक अलग छवि बनाई है। इससे पहले भी कई ऐसी घटनाएँ हुई हैं जिनमें वैभव कृष्ण ने सराहनीय काम किया है। नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण की गिनती पुलिस महकमा के इमानदार पुलिस अफसरों में होती है। कुछ महीने पहले ही उन्होने तीन पत्रकारों और दो इंस्पेक्टरों को एक उगाही केस में रंगे हाथ पकड़ कर एक मिसाल कायम किया था। पुलिस के भीतर से पुलिस के अपराध पर अंकुश लगाना आसधारण कार्य है, जिसे वैभव कृष्ण लगातार कर रहे हैं।

 

देखने में यह घटना बहुत छोटी है, लेकिन यदि इसके विस्तार और इसकी गहराई पर विचार किया जाय तो यह न सिर्फ खतरनाक है, बल्कि समाज के लिए अत्यधिक चिंतनीय भी है। पुलिस प्रशासन मे शामिल लोग यदि दिल्ली-नोएडा जैसी हाई-फाई जगहों पर इस तरह के जघन्य अपराध करने की हिम्मत कर रहे हैं तो सोचने की बात यह है कि सुदूर ग्रामीण इलाकों में क्या होता होगा? यहाँ तो हर घटना पर मीडिया की नजर रहती है, फिर भी पिछले 6 महीने से यह गैंग काम कर रहा था। जहां मीडिया की पहुँच न के बराबर है वहाँ क्या होता होगा। प्रशासन में शामिल लोग इस तरह के आपराधिक कृत्यों के बारे में कैसे सोचते होंगे? क्या उन्हें अपनी ज़िम्मेदारी और उसकी ईमानदारी का रत्ती भर भी खयाल नहीं होगा? क्या उन्हें अपने महकमे और प्रशासन की प्रतिष्ठा का जरा भी ध्यान नहीं रहता होगा? जहाँ के बड़े अधिकारियों की पहुँच ऐसी नहीं होगी वहाँ की स्थिति कैसी होगी? जहाँ वैभव कृष्ण जैसे तेज-तर्रार और ईमानदार आधिकारी नहीं होंगे वहाँ क्या होता होगा? ऐसा तो बिलकुल नहीं है कि ऐसी घटनाएँ सिर्फ नोएडा में ही घटित होती हैं। यह तो कहीं भी हो सकतीं हैं। इस तरह के अनेक सवाल हैं जो इस घटना से जुड़े हुए हैं। आखिर आम जनमानस किस पर भरोसा करे, किसके सहारे आगे बड़े। सरकार को पुलिस प्रशासन को लेकर बहुत सजग होना होगा। इसमें सुधार के सार्वजनिक प्रयास होने चाहिए, अन्यथा इसकी शक्ल बहुत विकृत हो सकती है।

ऐसे हालात में जनमानस की चिंता और ज़िम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है कि वह प्रशासन की ऐसी करतूतों को न सिर्फ सामने लाये, बल्कि उसका पुरजोर विरोध करे। उसे उचित कानूनी अंजाम तक पहुंचाए, क्योंकि इन लोगों से आम जनता को कानूनी सहयोग की उम्मीद थी वे तो खुद ही गैरकानूनी हो गये। ऐसे में आम जनमानस के बीच ईमानदार और संवेदनशील लोग भी शक के घेरे में आएंगे।


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