जल संचय पर प्रधानमंत्री की गुहार

Published : Jul 01, 2019 04:57 pm | By: National Mindset News

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जल आज के भारत के लिए बहुत संवेदनशील विषय है। भारत के कई क्षेत्र आज गंभीर जल संकट से जूझ रहे हैं। यह आने वाले समय में यह और भयावह हो सकता है, बशर्ते इससे निपटने के लिए समय रहते हम सभी सचेत हो जाएँ। कल प्रधानमंत्री ने इसी मुद्दे को अपने मन की बात कार्यक्रम में शामिल किया। उन्होंने देश में पानी की समस्या से जुड़ी चुनौतियों का जिक्र करते हुए लोगों से जल संरक्षण के लिए जल आंदोलन चलाने की अपील की।


कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दूसरे कार्यकाल के पहले मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से देश की जनता से जुड़े। मन की बात कार्यक्रम को प्रधानमंत्री के पहले कार्यकाल में आम जन के बीच खूब लोकप्रियता मिली थी। इस बार के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कई मुद्दों को उठाया जिसमें जल संरक्षण भी एक था। जल संरक्षण एक ऐसा विषय है जिसका सीधा संबंध जीवन से है।जल की समस्या को लेकर सरकार एक सुचिंतित रास्ता अपना रही है। इस मुद्दे पर सरकार संवेदनशील है। यही कारण है कि इस बार सरकार ने एक जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया है।

प्रधानमंत्री ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैंने पानी के संचय के लिए ग्राम प्रधानों को पत्र लिखा हैं। उन्होंने फिल्म, खेल, मीडिया, सामाजिक एवं संस्कृति क्षेत्र से जुड़े हुए लोगों से जल संरक्षण के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने की अपील की। लेकिन यह सिर्फ प्रधानमंत्री का काम नहीं है। इसका समाधान जनभागीदारी के बिना संभव नहीं है। प्रधानमंत्री का संकेत भी इसी ओर था।  

जल संरक्षण पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्षा जल का सिर्फ आठ प्रतिशत ही हम बचा पाते हैं। जबकि पानी की कमी से देश के कई हिस्से सालभर प्रभावित रहते हैं। मेरा विश्वास है कि पानी परमेश्वर का दिया हुआ प्रसाद है, पानी पारस का रूप है। पहले कहते थे कि पारस के स्पर्श से लोहा सोना बन जाता है। मैं कहता हूँ पानी पारस है और पारस से, पानी के स्पर्श से, नवजीवन निर्मित हो जाता है।

वही इसके समाधान की ओर आम जन का ध्यान खींचते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हम जनशक्ति से जल संकट का समाधान कर लेंगे। जैसे स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाया गया वैसे ही जल संरक्षण के लिए भी जन आंदोलन चलना चाहिए। .

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जल की महत्ता को सर्वोपरि रखते हुए केंद्र सरकार ने नया जलशक्ति मंत्रालय बनाया है। इससे पानी से संबंधित सभी विषयों पर तेजी से फैसले लेने में मदद मिलेगी और सभी योजनाओं के अमल में तेजी आएगी।

यह पूरा उद्बोधन एक ऐसे मुद्दे पर था जिसका संबंध सभी लोगों है। इस परिप्रेक्ष्य में अच्छी बात यह है कि सरकार इसे लेकर सजग और संवेदनशील है। आने वाले समय में सरकार इसे अपनी मुख्य योजनाओं में शामिल कर सकती है। जिससे देश के आम लोग लाभान्वित होंगे।


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