एक अदद जीत की चाह में एक चायवाला लड़ रहा है 23वां चुनाव।

Published : Apr 20, 2019 06:08 pm | By: National Mindset News

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देश में लोकसभा चुनाव की गहमागहमी है। बड़े बड़े दिग्गज मैदान में हैं। इनके बीच एक शख्स ऐसा भी है जो पिछले 25 सालों से एक जीत की आस में लगातार चुनाव लड़ता जा रहा है। हम बात कर रहे हैं मध्य प्रदेश के एक 'चुनाव वीर' चायवाले की। इनका नाम है आनंद सिंह कुशवाहा जो कि अपना 23वां चुनाव लड़ रहे हैं और ग्वालियर लोकसभा क्षेत्र से मैदान में हैं।


 22 बार की हार और आर्थिक नुकसान के बावजूद इनका हौसला टूटा नहीं है। चुनाव में जीत के लिए इनकी उम्मीद आज भी कायम है। 49 साल के आनंद का चुनावी सफर 25 साल पहले शुरू हुआ और तब से ये हर चुनाव में किस्मत आजमाते रहे हैं। उनका कहना है कि 'यह एक आकर्षण है। लोगों के अलग-अलग शौक होते हैं और यह मेरा है। मैं लोकतंत्र के इस महापर्व का हिस्सा बनना चाहता हूं।' 'देश के जिम्मेदार नागरिक के तौर पर यह मेरा कर्तव्य भी है।' आनंद, नगरपालिका से लेकर, विधानसभा, लोकसभा और राष्ट्रपति चुनाव तक सभी में किस्मत आजमा चुके हैं। उनका मानना है कि चुनाव एक गंभीर मुद्दा है, जिसमें आपको जरूर शामिल होना चाहिए। आनंद सिंह कुशवाहा को 22 बार शिकस्त झेलनी पड़ी लेकिन इसके बावजूद वह लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। कुशवाहा ने बीएसपी के नाम पर नामांकन कर दिया है लेकिन बीएसपी ने उन्हें टिकट नहीं दिया है। यदि टिकट नहीं मिलता है तो वे निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ेंगे। वह कहते हैं, 'मुझे उम्मीद है कि इस बार मैं जीत हासिल करूंगा।' पहली बार कुशवाहा ने 25 साल पहले ग्वालियर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई थी। उन्होंने बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और नारायण सिंह कुशवाहा के खिलाफ मैदान में थे, जो बाद में बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री बने। इसके बाद जो भी चुनाव सामने आया, सबमें उन्होंने पर्चा भरा। अब इसे आनंद सिंह की सनक कहें या शौक, उनका चुनावी सफर एक जीत की आस में लगातार जारी है। उनके परिवार वालों ने भी अब इसे स्वीकार कर लिया है।


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