मुस्लिम लीग की गोद में बैठी कांग्रेस।

Published : Apr 06, 2019 07:47 pm | By: National Mindset News

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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी अमेठी के अलावा केरल के वायनाड सीट से भी चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें कुछ गलत भी नहीं है। बड़े बड़े नेता दो सीटों से चुनाव लड़ते रहे हैं। सवाल उठ रहे हैं वायनाड सीट के चुनाव पर, क्योंकि मुस्लिम बहुल इस सीट पर जीत के लिए कांग्रेस ने मुस्लिम लीग का सहारा लिया है।


इतिहास में यह पहली बार होगा जब कोई कांग्रेस अध्यक्ष जीत के लिए मुस्लिम लीग पर निर्भर होगा। इण्डियन यूनियन मुस्लिम लीग का गठन 1948 में हुआ लेकिन इसका इतिहास अखिल भारतीय मुस्लिम लीग के गठन के साथ ही जुड़ा हुआ है, जिसने देश के बंटवारे और पाकिस्तान के गठन में सक्रिय भूमिका निभाई। राहुल गांधी का अमेठी से पलायन 2019 के आम चुनाव में कांग्रेस के खाते में दर्ज होने वाली पहली हार की तरह है। यह एक उलझी हुई पहेली ही है कि आखिर राहुल गांधी ने वायनाड ही क्यों चुना? राहुल गांधी के वायनाड से भी चुनाव लड़ने के फैसले का केवल एक ही कारण है, इस संसदीय क्षेत्र में करीब आधे मतदाता मुस्लिम हैं। केरल और खासतौर पर वायनाड में अधिकांश मुसलमान मुस्लिम लीग को वोट देते हैं। राहुल गांधी को जीत के लिए मुस्लिम लीग पर निर्भर रहना होगा। कांग्रेस चाहे तो अपने नेतृत्व वाले मोर्चे यूडीएफ की जीत के आंकड़ों को देख सकती है। दरअसल जो दल उसकी मदद कर सकता है वह मुस्लिम लीग ही है। अगर अमेठी सीट राहुल गांधी के लिए सुरक्षित नहीं है तो फिर इस देश में कांग्रेस अपने लिए किसी सीट को सुरक्षित नहीं मान सकती। उनका यह कदम हैरान करने वाला है कि वह उत्तर प्रदेश में परिवार की अपनी पारंपरिक सीट से एक तरह किनारा करके सुदूर दक्षिण में केरल की पहाड़ियों के बीच बसे वायनाड में अपनी राजनीतिक किस्मत आजमाने गये हैं। राहुल के रोड शो में जिस तरह कांग्रेस के साथ मुस्लिम लीग के झंडे लहरा रहे थे, उसे बीजेपी ने लपक लिया है और कहा जा रहा है कि जब राहुल गांधी को हिंदुओं का वोट चाहिए होता है तब वह 'जनेऊ' पहन लेते हैं और मंदिर-मंदिर घूमते हैं लेकिन आज जैसे ही उन्हें मुस्लिम वोटों की जरूरत पड़ी है तब वह मुस्लिम लीग के हरे रंग के झंडे का इस्तेमाल करने लगे हैं।  यह कम दिलचस्प नहीं है कि वायनाड में राहुल गांधी भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी यानी भाकपा उम्मीदवार के खिलाफ चुनावी रण में उतर रहे हैं। यह वही राहुल गांधी हैं जो सभी साथी राजनीतिक दलों के बीच यह कहते हुए घूम रहे थे कि भाजपा को हराने के लिए वे सभी आपसी मतभेद भुलाकर उसे सत्ता से बाहर करने में सहायक बनें। लेकिन वायनाड ने विपक्षी गठजोड़ की सारी गाठें एक झटके में खोलकर रख दी हैं।

 

 


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