चुनावी दंगल जीत कर आए सांसदों की अब लुटियंस में घर जीतने की जद्दोजहद

Published : Jun 07, 2019 07:42 pm | By: National Mindset News

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लोकसभा चुनाव जीतकर दिल्ली पहुंचे सांसदों के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है खुद के लिए बेहतर आशियाने की व्यवस्था करना। इनमें भी पहली बार जीत कर आए सांसदों को परेशानी ज्यादा है क्योंकि निवर्तमान सांसदों के पास पहले से आवास उपलब्ध है और नयी व्यवस्था होने तक वे उसी में रहेंगे। ये सांसद अभी अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं और जल्द ही लुटियन दिल्ली में फैले बंगले और फ्लैट इन्हें आवंटित कर दिए जाएंगे। अब इनमें से किसको कौन सा बंगला या फ्लैट मिलेगा इसको लेकर लोकसभा सचिवालय ने अपनी कवायद शुरू पर दी है।


17वीं लोकसभा में कुल 267 सांसद पहली बार चुनकर आए हैं। निवर्तमान सांसदों में से 230 फिर से चुने गए हैं। 45 सांसद ऐसे हैं जो 16वीं लोकसभा के सदस्य नहीं थे लेकिन पहले की लोकसभाओं के सदस्य रह चुके हैं। सांसदों को उनके ठिकाने हाउस कमेटी आवंटित करती है। लोकसभा पूल में कुल 517 घर हैं जिनमें टाइप-आठ बंगलों से लेकर छोटे फ्लैट तक हैं। इनके अलावा एमपी हॉस्टल भी हैं। नए लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव के बाद सबसे पहले हाउस कमेटी का ही गठन होगा। 250 नए सांसदों को अभी विभिन्न राज्य भवनों और वेस्टर्न कोर्ट में ठहराया गया है। नए सांसदों ने अपनी पसंद बताते हुए फार्म भरकर जमा किया है। सांसदों द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एक ‘स्टेटमेंट’ हाउस कमेटी को उपलब्ध कराया जाएगा और कमेटी इसके आधार पर विभिन्न तरह के आवास के आवंटन का मानदंड तय करेगी। हाउस कमेटी विभिन्न श्रेणियों में उपलब्ध फ्लैटों और इनके लिए मिले आवेदनों की संख्या के आधार पर फैसला लेगी। लोकसभा पूल के लिए उपलब्ध रिहाइशी ठिकानों में 159 बंगले, 37 ट्विन फ्लैट, 193 सिंगल फ्लैट, 96 बहुमंजिला इमारतों में फ्लैट और 32 इकाइयां सिंगुलर रेगुलर ठिकानों की हैं। यह सभी आवासीय ठिकाने सेंट्रल दिल्ली के विभिन्न इलाकों में स्थित हैं। सभी निवर्तमान सांसदों को अपने परिसरों को खाली करने के लिए 24 मई से एक महीने का समय दिया गया है। इनमें जो इसबार सांसद नहीं बन पाए हैं वो अपना आवास खाली कर देंगे और जो फिर से सांसद बने हैं उन्हें या तो उनका वर्तमान आवास ही फिर से आवंटित हो जाएगा या वरियता के हिसाब से दूसरा आवास भी दिया जा सकता है। निवास के आवंटन में कई बातों को ध्यान में रखा जाता है। इनमें सदस्य की वरिष्ठता, सुरक्षा की जरूरतें या फिर यह कि सदस्य पहले मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राज्य मंत्री या विधायक रह चुका है या नहीं। हाउस कमेटी अपने मानदंड तय करती है लेकिन सर्वोच्च श्रेणी के बंगले सर्वाधिक वरिष्ठ सदस्यों को दिए जाते हैं। वैसे निवर्तमान सांसद जो इस बार चुनाव हार गये हैं, उनको लोकसभा अध्यक्ष की सहमति के बाद चार महीने और या फिर स्वास्थ्य कारणों से छह महीने और रहने दिया जा सकता है। ऐसे में हर सांसद की कोशिश होती है कि उसे अच्छा से अच्छा आवास आवंटित हो। आवास का लोकेशन, दिशा और वास्तु भी काफी मायने रखता है। इनमें कुछ आवासों को अशुभ भी माना जाता है। सांसदों की कोशिश होती है कि ऐसे आवास उन्हें आवंटित न हों। लेकिन किसी न किसी को तो मिलना ही है। फिर कुछ दिनों तक इन आवासों में शुभ मुहूर्त, गृह प्रवेश, ग्रह शांति और हवन पूजन का दौर भी चलता है।


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