प्रशांत किशोर के चक्रव्यूह में नीतीश कुमार, एनडीए से अलग तलाश रहे सियासी जमीन

Published : Jun 10, 2019 08:37 pm | By: National Mindset News

54 views

जनता दल यूनाइटेड का बिहार के बाहर के राज्यों में एनडीए के साथ कोई गठबंधन नहीं रहेगा। आने वाले महीनों में होने वाले विधानसभा चुनावों में जेडीयू अकेले मैदान में उतरेगी। इस साल के अंत और अगले वर्ष जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने हैं। जेडीयू की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिये गये इस फैसले के पीछे स्ट्रैटिजिस्ट प्रशांत किशोर का दिमाग बताया जा रहा है।


पटना में हुई जेडीयू राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक को काफी अहम माना जा रहा था और सबकी नजर इसपर टिकी थी कि क्या निकल कर आता है। और फैसला यही निकल कर आया कि बिहार में जेडीयू, बीजेपी के साथ बनी रहेगी और 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ेगी लेकिन आने वाले महीनों में बिहार से बाहर जम्मू-कश्मीर, झारखंड, हरियाणा और दिल्ली में एनडीए का हिस्सा नहीं रहेगी और अकेले चुनाव मैदान में उतरेगी।  मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ठीक बगल वाली कुर्सी पर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर बैठे दिखे। पिछले दिनों प्रशांत किशोर और सीएम नीतीश के बीच तनातनी की खबरें आ रही थीं लेकिन इस बैठक में जिस तरह प्रशांत और नीतीश घुल मिलकर बातें करते दिखे उससे तो सबकुछ सामान्य ही दिख रहा है। 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के रणनीतिकार रहे प्रशांत किशोर अपनी शातिर राजनीतिक चालों के लिए जाने जाते हैं। माना जाता है कि 2015 में नीतीश के रणनीतिकार बने पीके ने ही नीतीश को लालू यादव के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की सलाह दी थी। इस चुनाव में जेडीयू-आरजेडी को मिली अप्रत्याशित जीत ने नीतीश का भरोसा पीके पर पक्का कर दिया। साथ ही नरेद्र मोदी को मिली सफलता भी पीके का भाव बढ़ाने के लिए काफी था। कहीं न कहीं नीतीश को लगता है की पीएम बनने की उनकी दबी हुई इच्छा को प्रशांत किशोर ही पूरी करवा सकते हैं। लेकिन 2017 में नीतीश के फिर से बीजेपी के साथ आने के फैसले का पीके ने खुलकर विरोध भी किया था। जबकि नीतीश कुमार ने खुलेआम यह माना था कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने ही प्रशांत किशोर को उनके पास भेजा था। तो क्या प्रशांत किशोर अपनी दुकान चमकाने के लिए बीजेपी और जेडीयू दोनों को डबल क्रॉस कर रहे हैं। इन दिनों फिर से बीजेपी और जेडीयू के बीच जो तल्खी बढ़ती हुई दिख रही है, क्या उसके पीछे भी पीके का ही हाथ है। इन दिनों एक बार फिर प्रशांत किशोर सुर्खियों में हैं। कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी की ऐतिहासिक जीत के पीछे प्रशांत किशोर की ही रणनीति का बड़ा हाथ था। और अब वे बंगाल में ममता बनर्जी से अनुबंध कर रहे हैं, 2021 में होने वाले विधानसभा चुनाव में तृणमूल की जीत की रणनीति बनाने के लिए। इसपर नीतीश कुमार का कहना है कि ये प्रशांत किशोर की निजी संस्था का मामला है और इससे जेडीयू का कोई लेना देना नहीं है। लेकिन सवाल तो बनता ही है कि पीके जेडीयू के उपाध्यक्ष हैं और जेडीयू एनडीए का हिस्सा है। फिर पीके एनडीए की कट्टर विरोधी ममता बनर्जी के रणनीतिक सलाहकार कैसे बन सकते हैं? प्रशांत किशोर कोई राजनीतिज्ञ नहीं हैं, लेकिन राजनेताओं के दिमाग से खेलना उन्हें खूब आता है।

 


Nationalmindset TV Analysis

Prediction        Result
View More

प्रधानमंत्री की उम्मीद, अमेरिकी राष्ट्रपति की मौजूदगी मिल का पत्थर सिद्ध होगी

यूपी के किसान अपनी मांगों को लेकर हड़ताल पर

सरकार ने दी राहत, होटल रूम में घटी जीएसटी

हाउडी मोदी कार्यक्रम से पहले आयोजित की गई एक कार रैली

प्लास्टिक के बदले मिलेगा अनाज

पांच दिन में फिर बढ़े पेट्रोल और डीजल के भाव

सुशांत सिंह राजपूत की फिल्म ड्राइव होगी नेटफ्लिक्स पर रिलीज

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने जनसभा को किया संबोधित

फेडरल बैंक में शुक्रवार रात लगी भीषण आग

विशाखापत्तनम में भांग को पुलिस ने किया नष्ट

पिछले पांच वर्षों में कितनी बदली महिलाओं की हालत, क्या रह गया बाकी।

मुसलमानों ने थामा कमल, रंग चढ़ा इंद्रेश कुमार का

PM Modi tendered his resignation to Ram Nath Kovind along with the Council of Ministers

मोदी की सुनामी में उड़ गई वंशवाद की राजनीति, मुख्यमंत्रियों के बेटे-बेटी से लेकर ‘महाराज’ तक हारे

सपने कितने ही सुहाने क्यों न हों, तब तक पूरे नहीं होते जब तक साथियों की सोच काम को लेकर एक जैसी नहीं होती है - प्रधानमंत्री

सीमा पर तैनात वीर जवानों को बच्चों ने कहा "Thank you", खूबसूरत कार्ड बनाकर व्यक्त की अपनी भावनाएं

Modi- Didi face-off in high stakes Bengal battle

"Villains end entire negativity on screen" Shailendra Shrivastava

बिहार में जाति धर्म से ऊपर उठकर विकास के मुद्दे पर वोट कर रहे हैं युवा, जातीय समीकरण को लग सकता है झटका।

हिन्दुत्व के मुद्दे पर लड़ी जाएगी भोपाल की जंग, दिग्गज दिग्विजय के खिलाफ बीजेपी ने उतारा साध्वी प्रज्ञा को।