लोकसभा चुनाव में प्राइवेट जासूसों की बढ़ी मांग, विरोधी पक्ष की चाल से लेकर उसके छुपे राज तक पर नजर।

Published : Apr 08, 2019 07:06 pm | By: National Mindset News

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इस बार का लोकसभा चुनाव हाईटेक होने के साथ साथ अनेक नये प्रयोगों के लिए भी जाना जाएगा। एक ओर जहां प्रचार के परंपरागत तरीकों को पीछे छोड़ते हुए उम्मीदवार सोशल मीडिया और हाईटेक इंतजामों पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं वहीं अपने विरोधियों की रणनीति और उनके छुपे हुए राज जानने के लिए जासूसी एजेंसियों की सेवा भी बड़े पैमाने पर ली जा रही है।


लोकसभा चुनाव जासूसी एजेंसियों के लिए बहार बनकर आया है। उम्मीदवार और विभिन्न राजनीतिक दल अपने विरोधियों के राज, उनकी रणनीति और उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने वाली जानकारियां हासिल करने के लिए जासूसों की सेवाएं ले रहे हैं। इससे जासूसी एजेंसियों के पास काम बढ़ा है, और मौके का फायदा उठाते हुए ये अपनी सेवाओं के बदले मुंह मांगी कीमत भी वसूल रहे हैं। राजनीतिक दल अपने विरोधियों पर नजर रखने के लिए जासूसी एजेंसियों की सेवाएं ले रहे हैं। वे विरोधियों की रणनीतियों, उनके छिपे आपराधिक रिकॉर्ड की जानकारियां और अवैध संबंधों या वीडियो की जानकारियां निकालना चाहते हैं, जिसका इस्तेमाल उनके चुनाव प्रचार अभियान के खिलाफ किया जा सके। इसके अलावा जिन्हें पार्टियों ने टिकट नहीं दिया है, वह भी जासूसी एजेंसियों को संपर्क कर रहे हैं। वे अपनी जगह टिकट पाए प्रत्याशी की गुप्त जानकारियों को सार्वजनिक करते हुए उसकी छवि खराब करना चाहते हैं, ताकि वह जीत न सके।' इन सारी सेवाओं के लिए एक लाख से लेकर 60 लाख रुपये तक का शुल्क लिया जा रहा है। नेताओं को भी अपने मनपसंद नतीजे पाने के लिए पैसा खर्च करने से परहेज नहीं है। चुनावों के दौरान निजी जासूसी एजेंसियों की सेवाएं लेना अब एक चलन बन गया है और इस बार इन सेवाओं की मांग काफी बढ़ी है । हालांकि, इस बार चुनाव पूर्व कई गठबंधन बनने के कारण एक नया चलन शुरू हुआ है। जो नेता गठबंधन के समर्थन में नहीं हैं वे साझीदार दल के बारे में जानकारियां एकत्र करने के लिए जासूसी एजेंसियों से संपर्क साध रहे हैं। इन सूचनाओं का इस्तेमाल वह गठबंधन को तोड़ने या जीत जाने पर सरकार के गठन में अपनी हिस्सेदारी हासिल करने के लिए करेंगे। सोशल मीडिया पर तमाम राजनीतिक दलों या नेताओं के खिलाफ तरह तरह की सूचनाएं और वीडियो वायरल हो रहे हैं। इन्हें तैयार करने में भी इन जासूसी एजेंसियों का काफी बड़ा योगदान है। काफी लंबे समय से यूरोप, अमेरिका में चुनावों से लेकर सरकार के गठन तक में, प्राइवेट जासूसी एजेंसियां बड़ी भूमिका निभाती आयी हैं। भारत में इसका चलन नया है। लेकिन इसबार के चुनावों में यदि इनकी भूमिका ठीक ठाक रही तो आने वाले चुनावों में इनकी मांग और बढ़ेगी।

 

 


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