बीजेपी का फिर से पुराने घोङों पर दाव, नहीं कटेंगे किसी भी केन्द्रीय मंत्री के टिकट।

Published : Mar 18, 2019 05:57 pm | By: National Mindset News

बीजेपी का फिर से पुराने घोङों पर दाव, नहीं कटेंगे किसी भी केन्द्रीय मंत्री के टिकट।

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बिहार से जुड़े सभी केंद्रीय मंत्रियों के टिकट बीजेपी ने लगभग तय कर दिए हैं। इसके साथ ही यह तय हो गया है कि पार्टी फिर से अपने पुराने घोङों पर ही दाव खेलने जा रही है। ऐसा माना जा रहा था कि जिन मंत्रियों का काम ठीक नहीं रहा है, इसबार उनका टिकट कट सकता है, लेकिन बिहार से आने वाले सभी मंत्रियों को दोबारा मौका देकर बीजेपी ने पक्का कर दिया है कि किसी भी केन्द्रीय मंत्री का टिकट कटने नहीं जा रहा है।


बीजेपी के इस फैसले के पीछे पार्टी की यह सोच भी हो सकती है कि किसी मंत्री का टिकट काटने से जनता में गलत संदेश जा सकता है कि सरकार का एक मंत्रालय पांच साल तक नाकारा मंत्री के हाथ में रहा, इसलिए वहां कोई काम नहीं हुआ होगा। एक ओर जब बीजेपी, सरकार के पांच साल के बेहतर काम  और विकास को लेकर ही जनता के सामने जा रही है, ऐसे में कोई भी नकारात्मक संदेश जाना ठीक नहीं होगा। लेकिन सवाल यह भी है कि जिन मंत्रियों ने पांच साल तक कुछ भी साबित नहीं किया, बङे बङे मंत्रालय लेकर बैठे रहे और कोई उपलब्धि हासिल नहीं कर पाये, ऐसे मंत्रियों को फिर से टिकट देकर भी बीजेपी मतदाताओं को कोई बहुत अच्छा संदेश नहीं देने जा रही। साथ ही सरकार की छवी को लगातार चमका कर रखने वाले मेहनती और कर्मठ मंत्रियों के मनोबल को भी नीचे गिराएगा। जाहिर सी बात है कि जब बिना काम किये भी पुरस्कार मिलना ही है तो फिर दिन रात काम करने का क्या फायदा। बिहार की प्रमुख सीटों पर बीजेपी के संभावित उम्मीदवारों की बात करें तो छपरा से राजीव प्रताप रुडी, पाटलिपुत्र से रामकृपाल यादव को टिकट मिलना तय है। वहीं पटना साहिब से शत्रुघ्न सिन्हा का टिकट काटकर इस बार यहां से केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को उतारा जाएगा। इसी तरह पूर्वी चंपारण से कृषि मंत्री राधामोहन सिंह, आरा से आके सिंह के टिकट पर मुहर लग चुकी है। अश्विनी चौबे बक्सर से ही लङेंगे लेकिन गिरिराज सिंह की नवादा सीट एलजेपी के खाते में चले जाने के बाद पार्टी उनको बेगूसराय से उतारने का मन बना चुकी है। पार्टी के इस फैसले से गिरिराज सिंह खुश नहीं हैं। उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने तक के संकेत दे दिए हैं। बेगूसराय से बीजेपी के एमएलसी रजनीश कुमार यहां से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे। क्षेत्र में उन्होंने काफी काम किया है और जनता के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं। उनका टिकट काटकर गिरिराज सिंह को उतारने के फैसले से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भी काफी नाराजगी है। बिहार में बीजेपी और जदयू 17-17 सीटों पर जबकि लोजपा 6 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इस बंटवारे में बीजेपी को अपनी गया, सीवान, वाल्मीकिनगर, गोपालगंज, झंझारपुर और नवादा की जीती हुई सीटें छोड़नी पङी हैं। इनमें पांच जदयू के लिए, जबकि एक लोजपा के लिए छोड़ी गई है। 2014 में एनडीए बिहार के सीमांचल में एक भी सीट नहीं जीत पाई थी। यहां मुस्लिम और यादव वोटरों का प्रभाव ज्यादा है। इसलिए इस क्षेत्र में आने वाली सुपौल, किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया और मधेपुरा सीट की जिम्मेदारी इस बार जदयू को दी गई है। बीजेपी अररिया से शाहनवाज हुसैन को मैदान में उतार सकती है।

 


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