लोकसभा चुनाव 2019, किन मुद्दों पर होगा घमासान?

Published : Mar 11, 2019 05:30 pm | By: National Mindset News

लोकसभा चुनाव 2019, किन मुद्दों पर होगा घमासान?

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लोकसभा चुनाव के लिए तारीखों की घोषणा हो चुकी है। पिछली बार के मुकाबले इस बार 7 चरणों में चुनाव कराया जाएगा। ऐसे में राजनीतिक दलों ने भी कमर कस ली हैं। यूं तो सभी राजनीतिक दल अपनी सहूलियत और अपने मतदाता को ध्यान में रखते हुए अपने चुनावी मुद्दों का चयन करेंगे, लेकिन फिर भी कुछ मुद्दे ऐसे हैं जिनका सरोकार देश के हर नागरिक से है। ये वो मुद्दे हैं, जो चुनाव परिणाम को भी काफी हद तक प्रभावित करेंगे।


राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद, स्थिर और मजबूत नेता बनाम विविधता और साझा लीडरशिप, महंगाई, बेरोजगारी, किसान या ग्रामीण मतदाता, जातीय समीकरण, भ्रष्टाचार, दलित और आदिवासी, महिलाएं, सरकार की उपलब्धियां और विफलताओं के अलावा वोटों का ध्रुवीकरण और सोशल मीडिया भी इस चुनाव में अहम मुद्दे बनने जा रहे हैं। पूरे चुनाव का तानाबाना ही इन मुद्दों के इर्द गिर्द बुना जाएगा। अब किसका मुद्दा पास होगा और किसका फेल यह चुनाव नतीजों के बाद ही पता चल पाएगा। फिलहाल राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद सबसे बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। 1990 के बाद से ही चुनावों में राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद बड़ा मुद्दा बनता रहा है। पुलवामा में सीआरपीएफ के जवानों की शहादत और उसके बाद भारतीय वायु सेना की तरफ से पाकिस्तान के बालाकोट में एयर स्ट्राइक के बाद इस मुद्दे ने बाकी सबको पीछे छोड़ दिया है और ये चुनाव की दिशा भी बदल सकता है। महंगाई का मुद्दा इस चुनाव में ज्यादा जोर पकड़ता नहीं दिख रहा है। मोदी सरकार कहीं न कहीं महंगाई पर लगाम लगाने में कामयाब रही है। विपक्ष चाहकर भी महंगाई के मुद्दे पर बीजेपी को घेर नहीं पा रही हैं। मोदी सरकार के खिलाफ विपक्ष के पास बेरोजगारी एक अहम मुद्दा है। किसान या ग्रामीण मतदाताओं का 2014 में बीजेपी की जीत में बङा योगदान रहा था। लेकिन इस बार किसान सरकार से नाराज बताए जा रहे हैं। राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के चुनाव में कांग्रेस ने इस मुद्दे का पूरा फायदा उठाने की कोशिश की और उन्हें सफलता भी मिली। इसके बाद बीजेपी ने कई और रास्तों से किसानों की मदद कर इस कमी को पूरा करने की कोशिश की है। 2014 के चुनाव में सबसे बड़ा मुद्दा था भ्रष्टाचार। कांग्रेस को इससे सबसे ज्यादा नुकसान हुआ था। पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल में पूरी कोशिश की है कि बीजेपी पर ऐसे आरोप न लग पाएं। लेकिन राहुल गांधी  जिस तरह राफेल डील को मुद्दा बनाकर सीधे प्रधानमंत्री पर ही भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं, इसपर मतदाता कितना भरोसा करेगा कह पाना मुश्किल है।

2014 की तरह यह चुनाव भी बीजेपी नरेंद्र मोदी के चेहरे पर लड़ेगी। वहीं विपक्षी गठबंधन दिखाना चाहेगा कि लोकतंत्र में साझे तरीके से कामों को बांटकर किया जाना चाहिए। बीजेपी यह मुद्दा भी उठाएगी कि विपक्षी पार्टियों के पास पीएम के लिए कोई चेहरा ही नहीं है। वहीं कांग्रेस इसका बचाव करते हुए कह सकती है कि गठबंधन भारत के विविध समाज के लिए बेहतर है। रणभेरी बज चुकी है और सारे महारथी मैदान में कूद चुके हैं।

 

 

 


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