अफसरों में बढता राजनीति का शौक, सरकारी नौकरी छोड़ चुनावी दंगल में कूदे कई अधिकारी।

Published : Mar 25, 2019 06:50 pm | By: National Mindset News

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पहले नौकरी से अवकाश के बाद अधिकारी राजनीति में कदम रखने की सोचते थे। राजनीति का ग्लैमर उन्हें इस रास्ते पर चलने को प्रेरित करता था। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में अधिकारियों का रूझान बदला है। अफसरों को राजनीति इस कदर भाने लगी है कि उन्हें इसके लिए अपनी नौकरी छोड़ने में भी संकोच नहीं है। हाल का सबसे बड़ा उदाहरण हैं 2010 बैच के आईएएस टॉपर शाह फैजल।


जम्मू-कश्मीर के पूर्व आईएएस अधिकारी शाह फैजल ने कुछ दिन पहले ही अपनी नई राजनीतिक पार्टी बनाई है, जम्मू-कश्मीर पीपल्स मूवमेंट। फैजल ने इसी साल जनवरी में नौकरी से इस्तीफा देते समय कश्मीर में कथित हत्याओं और इन पर केंद्र की ओर से कोई गंभीर प्रयास न करने का आरोप लगाया था। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम रमन सिंह के करीबी माने जाने वाले 2005 बैच के आईएएस अधिकारी ओपी चौधरी ने पिछले साल अगस्त में रायपुर के कलेक्टर का पद छोड़कर बीजेपी जॉइन की और पार्टी के टिकट पर खरसिया विधानसभा सीट से खड़े हुए, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। यूपी के मेरठ में इनकम टैक्स की प्रिंसिपल कमिश्नर प्रीता हरित ने 20 मार्च को नौकरी छोड़कर कांग्रेस जॉइन की है और आगरा से चुनाव लङ रही हैं। ओडिशा 1994 बैच की वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अपराजिता सारंगी ने अपने पद से इस्तीफा देकर पिछले साल नवंबर में बीजेपी का दामन थाम लिया। अपराजिता को बीजेपी ने भुवनेश्वर लोकसभा सीट से कैंडिडेट बनाया है। एचआरडी स्टेट मिनिस्टर सत्यपाल सिंह महाराष्ट्र कैडर के 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। 2014 में उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से इस्तीफा दे दिया और बीजेपी में शामिल हो गए। यूपी के बागपत से चुनाव जीते और केंद्र में मंत्री भी बन गए। 1992 बैच के आईआरएस अधिकारी दिल्ली के सीएम और AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल अपने पद से इस्तीफा देकर अन्ना आंदोलन से जुङे और बाद में राजनीति से जुङकर दिल्ली में बङी जीत हासिल की। 1963 बैच के आईएफएस अधिकारी कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने 1989 में राजनीति में आने के लिए वीआरएस ले लिया। 1986 बैच के आईपीएस डॉ. अजय कुमार 2010 में नौकरी छोङकर राजनीति में आए और 2011 में जमशेदपुर से सांसद चुने गये। अभी झारखंड कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

 इस तरह देखा जाए तो वरिष्ठ अधिकारियों में राजनीति के प्रति रूझान लगातार बढता ही जा रहा है।

 


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