विश्व के महान गणितज्ञ ICU में भर्ती

Published : Oct 16, 2019 06:05 pm | By: National Mindset News

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एक ऐसा शख्स जिन्हे गणित औऱ साइंस में जीनियस कहा जाता है...जिन्हे आर्यभट्ट के नाम से भी जाना जाता है...लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ जिससे वे मानसिक रूप से अवसाद मे चले गए....कहा जाता है कि वे भारत को औऱ भी उचाईयो पर ले जाने वाले आधार बन सकते थे... आखिर क्या है इनकी कहानी देखिए इस रिपोर्ट में..


.गौर से देखिए इन्हे...क्या आप इन्हे पहचान पा रहे है...अगर नही तो..हम बता देते है...ये  जिनीयस के भी जिनीयस हैं... विश्व के महान गणितज्ञ में से एक है...इन्हें साइंस और मैथमैटिक्स में जिनीयस कहा जाता है..कहा जाता है कि भारत को नई उचाईयो पर ले जाने वाले ये अधार बन सकते थे... लेकिन आज स्थिती ऐसी है  कि वे मानसीक रूप से बीमार है औऱ PMCH के ICU में भर्ती हैं...इससे पहले एक बार इन्हें डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गए जूठन में खाना तलाशते देखा गया था....इनका नाम डाँ वशिष्ठ नारायण सिंह है...औऱ इनका जन्म 2 अप्रेल 1946 को हुआ था...वशिष्ट ने अपने जिंदगी में बहुत उची उची उपलब्धिया हासिल की है...लेकिन सवाल ये उठता है कि ..एक बहुत ही मामूली आदमी का बेटा वशिष्ठ से आखिर क्या गलती हुई कि आज इस सिचुएशन में हैं?
सिर्फ और सिर्फ यही कि उनके रोम रोम में देशभक्ति बसी थी... अमेरिका का बहुत बड़ा ऑफर ठुकरा कर अपनी मातृभूमि  की सेवा करना चाहते थे.....लेकिन भारत माता की छाती पर पहले से बैठे कुपुत्रों ने उनको पागल बना दिया...हाँ आपने बिल्कुल सही सुना......वो वशिष्ठ पागल हो गया, जिनका जमाना था... जो गणित में आर्यभट्ट व रामानुजन का विस्तार माना गया था...वही वशिष्ठ, जिनके चलते पटना विश्वविद्यालय को अपना कानून बदलना पड़ा था। इस चमकीले तारे के खाक बनने की लम्बी दास्तान है।
डॉ.वशिष्ठ ने भारत आने पर इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (कोलकाता) की सांख्यिकी संस्थान में शिक्षण का कार्य शुरू कर दिया... कहते हैं यही वह वक्त था, जब उनका मानसिक संतुलन बिगड़ा...वे भाई-भतीजावाद वाली कार्यसंस्कृति में खुद को फिट नहीं कर पाए ....और भी कई बातें है जिनका असर उनके दिमाग पर पड़ा। 
कहा जाता है औरत किसी के सफलता का कारण बनती है.. तो बर्बाद भी औरत ही करती है... इस केस में भी ऐसा ही हुआ.. इनकी पत्नी ने इनके शोधपत्र को चुल्है में जला दिया था.. जिसके कारण से ये अवसाद मे चले गए....और रांची के मानसिक आरोग्यशाला में  उनको भर्ती कराया गया...धीरे धीरे वे सिज़ोफ्रेनिया नामक मानसिक बीमारी से पीड़ित हो गए...जिसके बाद 1978 में उनका सरकारी इलाज शुरू हुआ...लेकिन  जून 1980 में सरकार द्वारा दिया जाना वाला इलाज का पैसा बंद हो गया...फिर  डेविड अस्पताल में  उनको उनकी बीमारी के वजह से  बंधक बना दिया गया...कहा जाता है कि  नौ अगस्त 1989 में गढ़वारा  स्टेशन से वे लापता हो गए...फिर चार साल बाद वे  7 फरवरी 1993 को  डोरीगंज में एक झोपड़ीनुमा होटल के बाहर फेंके गए जूठन में खाना तलाशते मिले थे...तब से रूक रूक कर इनके इलाज का नौटंकी होती रही ..कभी सरकारी तो कभी प्राइवेट अस्पताल में.. पिछले दो दिन से वे पीएमसीएच के आईसीयू में भर्ती है..खबर यह है कि अभी जान बची हुई है। जल्द ही रिलीज हो जाएंगे..
उन्होने जिंदगी में बहुत उपलब्धीया हासिल की है...चाहे नेतरहाट की परीक्षा हो या हायर सेकेंड्री की परीक्षा हो दोनो में सर्वोच्चस्थान प्राप्त किया... 1964 में  इनके लिए पटना विश्वविद्यालय का कानून बदला औऱ  सीधे ऊपर के क्लास में दाखिला हुआ औऱ उन्होंने बी.एस-सी आनर्स में भी सर्वोच्चस्थान प्राप्त किया.. 8 सितंबर 1965 में इन्होने बर्कले विश्वविद्यालय में आमंत्रण दाखिला लिया.. वहा उन्हें जीनियसों का जीनियस" कहा था..
फिर वे 1966 में नासा गए... 1967 में कोलंबिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैथेमैटिक्स के निदेशक बने...औऱ् ठीक दो साल बाद यानी 1969 में  द पीस आफ स्पेसथ्योरी विषयक तहलका मचा देने वाला शोध पत्र  दाखिल किया...इतने कारनामें करने के बादे भी उन्हे कही ना कही अपने भारत के लिए कुछ करने कि तमन्ना थी ...औऱ उन्हे देशभक्ति का कीड़ा काटने लगा औऱ 1971 में वे भारत आगए... 1972-73 में  आइआइटी कानपुर , टाटा इंस्टीट्यूट आफ फंडामेंटल रिसर्च  तथा स्टैटिक्स इंस्टीट्यूट के महत्वपूर्ण पदों पर आसीन हुए...फिर उनकी जिन्दीगी में ऐसा समय आया जब कुछ बदलने वाला था...8 जुलाई 1973 में उनकी शादी हुई... फिर यही से सब कुछ बदल गया औऱ वे मानसीक रूप से बीमार होते गए...उनपे ना तो किसी समाज के ठेकेदार ने ध्यान दिया औऱ नाही किसी सराकर ने...
खैर, उन तमाम लोगों को बहुत-बहुत धन्यवाद, जो अपने को अनाम गुमनाम रखते हुए, डॉ.वशिष्ठ के भोजन और उनके रहने का इंतजाम, दवाई आदि का प्रबंध किए हुए हैं...वशिष्ठ का क्या गया?  गया तो इस देश-समाज का, जो उनका समाज कल्याण में सदुपयोग नहीं कर पाया...


महाराष्ट्र के यवतमाल में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा….राहुल ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने किसानों के क़र्ज़ माफ़ करने का वादा किया था लेकिन उन्होंने उस पैसे को कॉर्पोरेट टैक्स में छूट देने में लगा दिया। राहुल ने कहा कि पीएम मोदी अंबानी और अडाणी जैसे अरबपतियों के लाउडस्पीकर हैं….राहुल ने कहा, ''इस देश की अर्थव्यवस्था को कौन चला रहा है?  देश की अर्थव्यवस्था अडाणी और अंबानी के कारण नहीं है बल्कि किसानों, मज़दूरों और छोटे व्यापारियों के कारण है। जीएसटी ने लोगों की कमर तोड़ दी है। बीजेपी सरकार ने एक दिन में 1.25 लाख करोड़ का कॉर्पोरेट टैक्स माफ़ कर दिया……पिछले पाँच सालों में इस सरकार ने गिने-चुने उद्योगपतियों के 5.5 लाख करोड़ टैक्स माफ़ किए हैं। मोदी ने कोयला खदानों का निजीकरण किया और अब जितनी सरकारी कंपनियां हैं सबका निजीकरण किया जा रहा है। यह सरकार आपका पैसा 15-20 उद्योगपतियों को देने पर तुली हुई है।


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